संसद ने बॉयलर विधेयक, 2024 पारित कर दिया है, जिसे आज लोकसभा ने मंजूरी दे दी है। यह विधेयक बॉयलर अधिनियम, 1923 को निरस्त करता है, तथा बॉयलर के विनियमन और स्टीम बॉयलर के विस्फोट के खतरे से लोगों के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा के लिए प्रावधान करता है। राज्य सभा पिछले साल दिसंबर में ही इस विधेयक को पारित कर चुकी है। यह विधेयक देश में बॉयलर के निर्माण और उपयोग के दौरान पंजीकरण और निरीक्षण में एकरूपता का भी प्रावधान करता है।
व्यापार को आसान बनाने के लिए, इस विधेयक से एमएसएमई क्षेत्र सहित बॉयलर उपयोगकर्ताओं को लाभ होगा, क्योंकि विधेयक में गैर-अपराधीकरण से संबंधित प्रावधान शामिल किए गए हैं। बॉयलर और बॉयलर से निपटने वाले कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, सात अपराधों में से चार प्रमुख अपराधों में, जिनके परिणामस्वरूप जान और संपत्ति का नुकसान हो सकता है, आपराधिक दंड को विधेयक में बरकरार रखा गया है। अन्य अपराधों के लिए, राजकोषीय दंड का प्रावधान किया गया है।
लोकसभा में विधेयक पर बहस का जवाब देते हुए वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि सभी हितधारकों से चर्चा के बाद विधेयक को संसद में लाया गया है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार सहकारी संघवाद में विश्वास करती है और राज्यों के अधिकारों का अतिक्रमण करने का कोई सवाल ही नहीं है। उन्होंने कहा कि नया कानून व्यापार करने में आसानी और जीवन जीने में आसानी के दृष्टिकोण को दर्शाता है। श्री गोयल ने कहा, आज कई देश भारत के साथ सहयोग करना चाहते हैं क्योंकि सरकार व्यापार करने में आसानी की अवधारणा को बढ़ावा दे रही है।
विपक्ष के इस आरोप का जवाब देते हुए कि तीसरे पक्ष द्वारा निरीक्षण की अनुमति देने से सुरक्षा संबंधी मुद्दों से समझौता हो सकता है, श्री गोयल ने कहा, “यह प्रावधान 2007 में यूपीए सरकार के दौरान जोड़ा गया था और वर्तमान सरकार ने इस कानून में कोई बदलाव नहीं किया है। उन्होंने सदन को बताया कि सरकार ने विधेयक में सुरक्षा पहलुओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि छोटे कारोबारियों की सुविधा के लिए प्रक्रियाओं को भी आसान बनाया गया है। श्री गोयल ने यह भी कहा कि सरकार ने जलवायु परिवर्तन पर भी पूरा ध्यान दिया है।”
इससे पहले चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस के डॉ. कल्याण वैजीनाथ राव ने कहा कि सुरक्षा सुनिश्चित करने और प्रमाणन तथा उसके नवीनीकरण से संबंधित मुद्दों को सुलझाने से संबंधित मानदंडों पर स्पष्टता होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से औद्योगिक बॉयलरों से होने वाले प्रदूषण से संबंधित मुद्दे को सुलझाने का भी आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि पहले बॉयलर अधिनियम, 1923 में राज्य सरकार की कोई परिभाषा नहीं थी, लेकिन अब विधेयक में राज्य सरकार की परिभाषा को शामिल कर दिया गया है।
भाजपा के राजकुमार चाहर ने कहा कि उद्योगों में लगे श्रमिकों की सुरक्षा की दृष्टि से यह कानून बहुत महत्वपूर्ण है और यह सरकार की प्राथमिकता भी है। कानून में किए गए प्रावधानों से बॉयलर विस्फोट की घटनाओं में कमी आएगी तथा बॉयलरों का रखरखाव और निगरानी सुनिश्चित होगी।
सपा के आनंद भदौरिया ने कहा कि सरकार ने बॉयलर विस्फोट की घटना के मामले में छोटे और बड़े उद्योगपतियों के लिए एक समान वित्तीय दंड का प्रस्ताव किया है। उन्होंने कहा कि सरकार को बड़े उद्योगपतियों के लिए दंड बढ़ाना चाहिए ताकि वे ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कुशल इंजीनियरों और तकनीकी टीमों को नियुक्त करें।
चर्चा में तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय, द्रमुक के डीएम कथिर आनंद, जदयू के कौशलेन्द्र कुमार, कांग्रेस के शेर सिंह घुबाया, राजद के अभय कुमार सिन्हा और आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन सहित अन्य सदस्यों ने भाग लिया।
