दिल्ली विधानसभा में अंतरराष्ट्रीय थैलेसीमिया दिवस के अवसर पर एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने थैलेसीमिया रोगियों की देखभाल, गरिमा और आशा से भरे भविष्य की दिशा में सामूहिक प्रयास करने का सभी से आग्रह किया। उन्होंने थैलेसीमिया से जूझ रहे रोगियों और उनके परिवारों की दृढ़ता की सराहना करते हुए उन्हें समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
यह कार्यक्रम दिल्ली विधानसभा परिसर में नेशनल थैलेसीमिया वेलफेयर सोसायटी (एनटीडब्ल्यूएस) के सहयोग से आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता उपस्थित रहे। उनके साथ प्रमुख अतिथियों में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष एवं पूर्व गृह राज्य मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की विनीता श्रीवास्तव और एनटीडब्ल्यूएस के महासचिव डॉ. जेएस अरोड़ा उपस्थित रहे।
विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि आज का दिन थैलेसीमिया की रोकथाम, जागरूकता और सहयोग के प्रति हमारे नवनिर्मित संकल्प का प्रतीक होना चाहिए।भारत थैलेसीमिया से सर्वाधिक प्रभावित देशों में से एक है, जहां 5 करोड़ से अधिक वाहक और प्रतिवर्ष अनुमानित 12,000 से 15,000 बच्चे थैलेसीमिया मेजर के साथ जन्म लेते हैं। अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण एकमात्र स्थायी उपचार है, लेकिन इसकी लागत अत्यधिक है और यह डोनर की उपलब्धता पर निर्भर करता है। परिणामस्वरूप अधिकांश रोगियों को आजीवन रक्त संक्रमण और आयरन की कमी को दूर करने वाली चिकित्सा पर निर्भर रहना पड़ता है, जिसकी वार्षिक लागत लगभग दो लाख रुपये तक होती है।
इस चुनौती को देखते हुए दिल्ली सरकार पंजीकृत रोगियों को ये उपचार निःशुल्क प्रदान करती है। विजेंद्र गुप्ता ने रक्त संक्रमण की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्टिंग (एनएटी) को अपनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
उन्होंने बताया कि थैलेसीमिया मेजर तभी होता है जब माता-पिता दोनों वाहक होते हैं। उन्होंने वाहक स्क्रीनिंग और प्रसव के पूर्व परीक्षण की महत्ता पर प्रकाश डाला तथा लोक नायक अस्पताल में उपलब्ध निःशुल्क एंटेनाटल टेस्टिंग सेवाओं की जानकारी साझा की। गुप्ता ने स्वास्थ्यकर्मियों, शिक्षकों और मीडिया से इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने और जन-जागरूकता फैलाने का आग्रह किया।
कार्यक्रम में थैलेसीमिया से जान गंवाने वालों की स्मृति में एक प्रतीकात्मक पौधारोपण भी किया गया, जो एक ऐसे भविष्य की आशा का प्रतीक था, जहां यह पीड़ा समाप्त हो। उन्होंने एनटीडब्ल्यूएस, थैलेसीमिक इंडिया, थैलेसीमिया इंटरनेशनल फेडरेशन, चिकित्सा विशेषज्ञों और स्वैच्छिक रक्तदाताओं के कार्यों की सराहना की।
