नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने असम पुलिस के खिलाफ 171 कथित फर्जी एनकाउंटर मामलों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं। जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मामले को गंभीर मानते हुए असम राज्य मानवाधिकार आयोग को निर्देश दिया कि पीड़ित परिवारों से संपर्क करने के लिए सार्वजनिक नोटिस जारी करें।
कोर्ट ने कहा कि कुछ घटनाएं फर्जी एनकाउंटर हो सकती हैं, जो बेहद गंभीर हैं। अगर ये साबित होता है कि ये फर्जी एनकाउंटर हैं, तो ये संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का उल्लंघन है। ये गहन जांच के बाद ही पता चलेगा कि ये घटनाएं फर्जी एनकाउंटर थी या नहीं। ऐसे में राज्य मानवाधिकार आयोग इन घटनाओं की निष्पक्ष जांच करें और ये सुनिश्चित करें कि पीड़ित परिवारों का पक्ष सुना जाए। अगर कोई निर्दोष मारा गया है, तो उसकी जवाबदेही तय की जाए।
कोर्ट ने 25 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। यह याचिका आरिफ मोहम्मद यासिन ज्वादर ने दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि असम पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के 2014 के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हुए मई, 2021 से अगस्त, 2022 के बीच फर्जी एनकाउंटर किये हैं।
