नई दिल्ली। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने बुधवार को फेज़-IV के तुगलकाबाद-एरोसिटी कॉरिडोर पर किशनगढ़ और वसंत कुंज स्टेशन के बीच भूमिगत सुरंग का निर्माण कार्य पूरा करके एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। 1550 मीटर लंबी सुरंग खोदने के बाद टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) आज वसंत कुंज मेट्रो स्टेशन पर बाहर निकली। इस कार्य के लिए 91 मीटर लंबी विशाल टीबीएम का उपयोग किया गया।
डीएमआरसी के अनुसार एरोसिटी-तुगलकाबाद कॉरिडोर के हिस्से के रूप में इस खंड के अप लाइन और डाउन लाइन पर आवाजाही के लिए दो समानांतर गोलाकार सुरंगों का निर्माण किया गया। दूसरी समानांतर सुरंग का कार्य दिनांक 6 मार्च को पूरा किया गया था। इस नई सुरंग का निर्माण लगभग 22.86 मीटर (न्यूनतम गहराई 15.48 मीटर और अधिकतम 30.25 मीटर) की औसत गहराई पर किया गया है। सुरंग में लगभग 1105 रिंग लगाए गए हैं, जिनका आंतरिक व्यास 5.8 मीटर है।
डीएमआरसी के अनुसार सुरंग का निर्माण अर्थ प्रेशर बैलेंसिंग मेथड (ईपीबीएम) की जांची-परखी तकनीक का उपयोग करके किया गया है, जिसमें प्रीकास्ट टनल रिंग से बनी कंक्रीट लाइनिंग है। इन टनल रिंग को मुंडका में स्थापित पूर्णतया मशीनीकृत कास्टिंग यार्ड में कास्ट किया गया था। कंक्रीट सेगमेंट को त्वरित मजबूती प्रदान करने के लिए स्टीम क्योरिंग सिस्टम का उपयोग किया गया था। सुरंग निर्माण के दौरान मौजूदा संरचनाओं के नीचे सभी आवश्यक सुरक्षा सावधानियां बरती गईं। आस-पास की संरचनाओं पर लगाए गए अत्यधिक संवेदनशील उपकरणों से ज़मीनी गतिविधियों पर नज़र रखी गई, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं कोई सेटलमेंट न हो। अब तक स्वीकृत फेज़-IV के निर्माण कार्यों के भाग के रूप में, 40.109 कि.मी. भूमिगत लाइनों का निर्माण किया जा रहा है। वहीं डीएमआरसी ने बताया कि एरोसिटी-तुगलकाबाद कॉरिडोर में कुल 19.343 कि.मी. भूमिगत खंड हैं। टीबीएम एक मशीन है जिसका उपयोग मिट्टी और चट्टान के विभिन्न स्तरों के मध्य गोलाकार क्रॉस- सेक्शन वाली सुरंगों की खुदाई करने के लिए किया जाता है। उन्हें रेत से लेकर कठोर चट्टान तक को भेदने के लिए डिज़ाइन किया जा सकता है। टीबीएम ने दुनिया भर में सुरंग बनाने के काम में क्रांति ला दी है, जिससे इमारतों और अन्य सतही संरचनाओं को हानि पहुंचाए बिना सुरंग खोदी जा सकती है। टीबीएम भीड़भाड़ वाले शहरी क्षेत्रों में भूमिगत सुरंग निर्माण कार्य के लिए विशेष रूप से उपयोगी हैं। डीएमआरसी में फेज़-I से ही सुरंग निर्माण कार्य के लिए टीबीएम का उपयोग किया जा रहा है। फेज़-III के लगभग 50 कि.मी. लंबे भूमिगत खंड के निर्माण कार्य के दौरान राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में लगभग 30 टीबीएम को उपयोग में लाया गया था।
