नई दिल्ली, 18 जनवरी । राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने जम्मू-कश्मीर में स्थानीय प्रशासन के जरिए लोगों को घरों से बेदखल किए जाने के मामले पर कहा है कि आयोग इस मामले में कोई भी हस्तक्षेप नहीं करेगा। आयोग के अध्यक्ष इकबाल सिंह लालपुरा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में स्थिति बिल्कुल विपरीत है। वहां पर रहने वाले भी मुसलमान और सरकार में शामिल लोग भी मुसलमान हैं। इसलिए आयोग का वहां पर हस्तक्षेप करने का मामला नहीं बनता है।
मुख्यालय में बुधवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए लालपुरा ने कहा कि आयोग वहां पर हस्तक्षेप करता है, जहां पर अल्पसंख्यक समुदाय के साथ किसी अन्य समुदाय या सरकार के जरिए भेदभाव किया जाता है। जम्मू-कश्मीर में जिन लोगों को जमीन दी गई और जिन लोगों ने दी, वह सभी एक ही समुदाय के थे। अब इनसे जमीनें छीनी जा रही हैं, तो आयोग क्या कर सकता है। उनका कहना है कि वहां पर तो सरकार में शामिल बड़े-बड़े लोगों ने सरकारी जमीनों पर कब्जा कर रखा है, जिसमें कुछ पूर्व मुख्यमंत्री भी शामिल हैं। ऐसी स्थिति में अब अगर सरकारी जमीनों को छुड़ाने की मुहिम चलाई जा रही है, तो इस मामले से अल्पसंख्यक आयोग का दूर ही रहना बेहतर है।
लालपुरा ने कहा कि हल्द्वानी में अल्पसंख्यक समाज के लोगों को रेलवे की जमीन से बेघर किए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला सराहनीय है। उनका कहना है कि किसी को भी बिना पुनर्स्थापित किए वहां से हटाना उचित नहीं है। उनका कहना है कि आयोग ने वहां पर रह रहे लोगों से बातचीत करने और हालात की समीक्षा करने के लिए एक प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला किया है। जल्द ही यह प्रतिनिधिमंडल वहां का दौरा करेगा।
संवाददाता सम्मेलन में इकबाल सिंह लालपुरा ने बताया कि पंजाब में धर्मांतरण का मामला बार-बार उठाया जा रहा है। आयोग ने इस सिलसिले में पंजाब सरकार से मुद्दा उठाया है। पंजाब सरकार के मुख्य सचिव ने कहा है कि इस मामले में रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। आयोग अगले महीने पंजाब सरकार के साथ बैठक करके इस मामले पर गंभीरतापूर्वक बातचीत करेगा। पिछले साल जून महीने में आयोग ने पंजाब के सिख समुदाय के धर्मगुरु और बुद्धिजीवियों और ईसाई समुदाय के पादरियों के साथ एक बैठक आयोग में की थी, जिसमें ईसाई समुदाय के लोगों ने विश्वास दिलाया था कि वह धर्मांतरण के खिलाफ हैं और पंजाब में किसी भी तरह का धर्मांतरण नहीं किया जा रहा है।
इसके अलावा अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं को दी जाने वाली प्री मैट्रिक स्कॉलरशिप और उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए मौलाना आजाद फैलोशिप को बंद किए जाने का मुद्दा भी संवाददाता सम्मेलन में उठाया गया। लालपुरा ने जवाब देते हुए कहा है कि सरकार की तरफ से प्री मैट्रिक स्कॉलरशिप योजना को बंद किया जाना उचित कदम है क्योंकि राइट टू एजुकेशन एक्ट के तहत छात्र-छात्राओं को सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में सभी प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए अगर किसी छात्र को किसी भी तरह का संकट पैदा हो रहा है, तो इस सिलसिले में आयोग जांच कमेटी बनाएगा और सरकार को इससे अवगत कराने का काम करेगा।
