नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से वार्ता का आश्वासन मिलने के बाद गुरुवार को दिल्ली के वकीलों ने दो दिन से चल रहे न्यायिक बहिष्कार का आंदोलन वापस ले लिया है। अधिवक्ता दिल्ली के पुलिस थानों से ही वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये गवाही देने की अनुमति देने के दिल्ली के उप-राज्यपाल के नोटिफिकेशन के विरोध में आंदोलनरत थे। इसी के तहत 29 अगस्त को उप राज्यपाल के समक्ष प्रदर्शन किये जाने की योजना थी।
दिल्ली की निचली अदालतों के सभी बार एसोसिएशंस के संगठन कोआर्डिनेशन कमेटी ऑफ ऑल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट बार एसोसिएशंस ने न्यायिक बहिष्कार को वापस लेने की घोषणा दिल्ली पुलिस की उस सूचना के बाद किया है, जिसमें कहा गया है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस मसले पर दिल्ली के वकीलों से वार्ता करेंगे। वार्ता का परिणाम आने तक उप-राज्यपाल के नोटिफिकेशन पर कोई अमल नहीं होगा।
दिल्ली में वकीलों की हड़ताल के दौरान गुरुवार काे कड़कड़डूमा कोर्ट में प्रदर्शन के दौरान रविकांत शर्मा नामक वकील की हार्ट अटैक से मौत हो गयी। दूसरी ओर तीस हजारी कोर्ट, कड़कड़डूमा कोर्ट, राऊज एवेन्यू कोर्ट, साकेत कोर्ट, रोहिणी कोर्ट, पटियाला हाउस कोर्ट और द्वारका कोर्ट में वकीलों के न्यायिक बहिष्कार का खासा असर देखने को मिला। कोर्ट परिसरों में न्यायिक कार्य तो बाधित रहा ही आसपास की तमाम दुकानें भी बंद रहीं।
निचली अदालतों के वकीलों के पक्ष में दिल्ली उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन ने भी अपना समर्थन जताते हुए आज काम के दौरान वकीलों को काली पट्टी पहनने का आह्वान किया था। उच्चतम न्यायालय एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन ने भी निचली अदालत के वकीलों का समर्थन करते हुए उप-राज्यपाल के नोटिफिकेशन को वापस लेने की मांग की थी। देश भर के वकीलों के रजिस्ट्रेशन और नियमन के लिए बनी बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने भी उप-राज्यपाल के नोटिफिकेशन पर एतराज जताया था। दिल्ली के वकीलों की मांग का उच्चतम न्यायालय बार एसोसिएशन और दिल्ली उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन ने भी समर्थन किया था।
इस हड़ताल का आह्वान दिल्ली की निचली अदालतों के सभी बार एसोसिएशंस के संगठन कोआर्डिनेशन कमेटी ऑफ ऑल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट बार एसोसिएशंस ने किया था। कोआर्डिनेशन कमेटी ने कहा था कि दिल्ली के उप-राज्यपाल ने 13 अगस्त को एक नोटिफिकेशन जारी कर पुलिस थानों से पुलिसकर्मियों के बयान वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये दर्ज करने की अनुमति दी थी। इसके लिए कुछ स्थान तय किए गए हैं।
उप-राज्यपाल के इस फैसले के खिलाफ कोआर्डिनेशन कमेटी ने 20 अगस्त को दिल्ली के उप-राज्यपाल, केंद्रीय गृह मंत्री, केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री और दिल्ली के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अपना विरोध जताया था। कोआर्डिनेशन कमेटी के मुताबिक उप-राज्यपाल का नोटिफिकेशन केंद्रीय गृह सचिव के 15 जुलाई, 2024 के सर्कुलर के विपरीत था। केंद्रीय गृह सचिव के सर्कुलर में पुलिस थानों में किसी भी किस्म की गवाही से इनकार किया गया था।
