नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि सार्थक बहस और चर्चा संसदीय लोकतंत्र को मजबूत बनाती हैं और जनता की आकांक्षाओं को पूरा करती हैं। जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी विधानसभा के भीतर और बाहर दोनों जगह अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। विधानसभा केवल शक्ति प्रदर्शन का मंच नहीं बल्कि जनहित में गहन और गंभीर संवाद का सर्वोच्च मंच है।
यह बात दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष ने शुक्रवार को बेंगलुरू में आयोजित 11वें राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (सीपीए) भारत क्षेत्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही, जिसका विषय ‘विधायी संस्थाओं में संवाद एवं चर्चा : जनविश्वास का आधार, जनता की आकांक्षाओं की पूर्ति का माध्यम’ था।
विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि लोकतंत्र की असली सफलता केवल चुनावों से नहीं आंकी जा सकती क्योंकि वे तो पहला कदम मात्र हैं। लोकतंत्र की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि चुनावों के बाद सदन में किस स्तर की बहस और विचार-विमर्श होते हैं। सच्चा लोकतंत्र वही है जहां सभी विचारों को ध्यानपूर्वक सुना जाए। हंगामा, शोर-शराबा और वाकआउट से न केवल सदन का समय व्यर्थ होता है बल्कि जनता की आवाज भी दब जाती है। सदन में अनुशासन और मर्यादा बनाए रखना सदस्यों की सामूहिक जिम्मेदारी है। स्वस्थ बहस उपलब्धियों को उजागर करती है, कमियों को सामने लाती है और उपयोगी सुझाव देती है।
दिल्ली विधानसभा की कार्यवाही का उल्लेख करते हुए विजेंद्र गुप्ता ने बताया कि यहां सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों को चर्चा में भाग लेने का पर्याप्त अवसर दिया जाता है। प्रश्न काल के दौरान अधिकतम सदस्यों को पूरक प्रश्न पूछने का मौका दिया जाता है। विजेंद्र गुप्ता ने सभी जनप्रतिनिधियों से आह्वान किया कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सदन की गरिमा बनाए रखें और लोकतांत्रिक संस्थाओं की पवित्रता व प्रासंगिकता को निरंतर मजबूत करने का प्रयास करें।
