भोपाल, 23 जनवरी । सीएमसी वेल्लोर की प्रोफेसर देश की शीर्ष वायरोलॉजिस्ट डॉ. गगनदीप कांग ने भोपाल में आयोजित चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव में कोविड-19 के इलाज और वैक्सीन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। पैनल डिस्कशन में उन्होंने बताया कि कोरोना का ओमिक्रॉन वेरिएंट कोई सामान्य वायरस नहीं था, चूंकि हम वैक्सीनेटेड थे इसलिए यह ज्यादा घातक नहीं हो पाया। दूसरी ओर दक्षिण अफ्रीकी देशों में डेल्टा वेरिएंट के फैलने की दर सबसे तेज थी, लेकिन इससे वहां मौतें ज्यादा नहीं हुईं। इन देशों में ओमिक्रॉन ने भयावह स्थिति पैदा की।
भारत अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव के तीसरे दिन सोमवार को लर्निंग रिसोर्स सेंटर में न्यू एज टेक्नोलॉजी-शो में जैव प्रोद्योगिकी एवं कोरोना वैक्सीन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने अपनी बात रखी। इस दौरान जैव प्रोद्योगिकी विभाग की वरिष्ठ सलाहकार डॉ अलका शर्मा बतौर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थी जबकि डॉ. गगनदीप कांग विशेष रूप के रूप में कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं।
वैक्सीन निर्माण में डीबीटीकी अहम भूमिका: मुख्य अतिथि डॉ. अलका शर्मा ने कहा कि न्यू एज टेक्नोलॉजी के दौर में जब मार्च 2020 में कोरोना भारत में आया तो देश की सभी एजेंसियों ने साथ मिलकर काम किया और हमने सबसे पहले वैक्सीन तैयार की। बायोटेक्नोलॉजी विभाग ने विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर वैक्सीन दूसरे देशों तक भी पहुंचाई। किसी भी टेक्नोलॉजी का विकास एक दिन में नहीं होता, इसमें काफी मेहनत लगती है। उन्होंने कहा कि कोरोना वैक्सीन तैयार करने में डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी की भूमिका काफी अहम है।
एम्स नई दिल्ली स्थित मेडिकल ऑन्कोलॉजी डिपार्टमेंट के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ मयंक सिंह ने कैंसर के इलाज के लिए न्यू एज टेक्नोलॉजी एडेप्टिवसेल थेरेपी के बारे में ज्ञानवर्धन किया। डीबीटी की ओर से संगीता कस्तूरी इस सत्र की मॉडरेटर रहीं। उन्होंने बताया कि कोरोना का ओमिक्रॉन वेरिएंट कोई सामान्य वायरस नहीं था चूंकि हम वैक्सीनेटेड थे, इसलिए यह ज्यादा घातक नहीं हो पाया।
