हरित समुद्री भविष्य की ओर भारत: नए युग की दहलीज पर खड़ा देश
भारत एक परिवर्तनकारी समुद्री युग की ओर तेजी से बढ़ रहा है। अपनी विशाल तटरेखा, बढ़ती औद्योगिक क्षमता और रणनीतिक भौगोलिक स्थिति का लाभ उठाते हुए देश न केवल व्यापार और कनेक्टिविटी को मजबूत कर रहा है, बल्कि स्थिरता और लचीलेपन पर आधारित एक नई समुद्री विरासत भी गढ़ रहा है। यह बात सोमवार को जारी एक आधिकारिक बयान में कही गई।
मैरीटाइम इंडिया विजन 2030: हरित और टिकाऊ समुद्री खाका
बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय (MoPSW) ने मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 की रूपरेखा तैयार की है। इसका उद्देश्य भारत के समुद्री क्षेत्र को सशक्त बनाना और इसे हरित, स्वच्छ व टिकाऊ भविष्य की दिशा में आगे ले जाना है।
इस विजन के तहत समुद्री परिवहन को पर्यावरण के अनुकूल बनाने पर विशेष जोर दिया गया है।
स्वच्छ ईंधन पर टिका समुद्री परिवहन का भविष्य
सरकारी बयान के अनुसार, समुद्री परिवहन का भविष्य अब हरित हाइड्रोजन, अमोनिया, जैव ईंधन और एलएनजी जैसे स्वच्छ ईंधनों में निहित है। इस दिशा में राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन अहम भूमिका निभा रहा है, जिससे बंदरगाह न केवल व्यापार के केंद्र बनें, बल्कि सतत विकास के इंजन भी बन सकें।
राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन: बड़े लक्ष्य, बड़ा असर
कार्बन उत्सर्जन कम करने और भारत को हरित हाइड्रोजन के क्षेत्र में वैश्विक नेता बनाने के उद्देश्य से शुरू किए गए इस मिशन का लक्ष्य है:
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2030 तक 5 मिलियन टन प्रति वर्ष हरित हाइड्रोजन उत्पादन
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लगभग 8 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करना
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6 लाख नए रोजगार सृजित करना
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जीवाश्म ईंधन आयात में करीब 1 लाख करोड़ रुपये की बचत
हरित हाइड्रोजन हब बनेंगे प्रमुख बंदरगाह
मिशन के तहत बड़े पैमाने पर उत्पादन, पायलट प्रोजेक्ट्स, इलेक्ट्रोलाइजर निर्माण, स्किल डेवलपमेंट और रिसर्च पर फोकस किया गया है।
इसके लिए तीन प्रमुख बंदरगाहों—कांडला, पारादीप और तूतीकोरिन—को हरित हाइड्रोजन हब के रूप में विकसित करने के लिए चिन्हित किया गया है।
स्वच्छ बंदरगाह, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और कम उत्सर्जन वाले बेड़े
दूरदर्शी नीतियों, विधायी सुधारों और हरित जहाजरानी पहलों के जरिए भारत अपने समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को नया स्वरूप दे रहा है। इसका लक्ष्य है:
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स्वच्छ और स्मार्ट बंदरगाह
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कम उत्सर्जन वाले जहाज
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आधुनिक और टिकाऊ बुनियादी ढांचा
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समावेशी आर्थिक विकास
मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047: दीर्घकालिक रोडमैप
भारत के समुद्री पुनरुत्थान को गति देने के लिए मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047 भी शुरू किया गया है। इसके तहत:
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बंदरगाहों
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तटीय जहाजरानी
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अंतर्देशीय जलमार्ग
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जहाज निर्माण
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हरित जहाजरानी
जैसे क्षेत्रों में करीब 80 लाख करोड़ रुपये के निवेश की परिकल्पना की गई है।
हरित गलियारे और वैकल्पिक ईंधन पर जोर
सरकार हरित समुद्री संचालन को बढ़ावा देने के लिए:
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हरित समुद्री गलियारे स्थापित कर रही है
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प्रमुख बंदरगाहों पर हरित हाइड्रोजन ईंधन भरने की सुविधा विकसित कर रही है
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मेथनॉल-ईंधन वाले जहाजों को प्रोत्साहित कर रही है
