बाबा गुरु घासीदास जयंती का पर्व एक ऐसा अवसर होता है जब गाँव गाँव और कस्बे कस्बे में छत्तीसगढ़ के सतनामी समाज ही नहीं अपितु बहुतेरे संगठन और जातीय समाज एक साथ आते हैं और मनखे मनखे एक समान का भाव जगाते हैं ।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं ने भी कई स्थानों पर ना सिर्फ़ इन कार्यक्रमों में भाग लिया अपितु अपने अनुशासित कार्य क्रम भी प्रस्तुत किये।
बिलासपुर/रायपुर/पलारी में ‘सत्य’ और ‘समानता’ के उद्घोष के साथ परम पूजनीय बाबा गुरु घासीदास जी की जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों ने सतनामी समाज के बंधुओं के साथ मिलकर शोभायात्राओं में हिस्सा लिया, और जैतखाम की पूजा-अर्चना कर समाज को एकता के सूत्र में पिरोने का कार्य किया।
पलारी (कोसमंदा) में ‘पालो’ अर्पण का कार्यक्रम उल्लेखनीय था । पलारी विकासखंड के ग्राम कोसमंदा में आयोजित इस कार्यक्रम में संघ के सह प्रांत प्रचारक नारायण नामदेव सम्मिलित हुए। उन्होंने विधि-विधान से आरती पूजन कर जैतखाम पर सफेद ‘पालो’ (ध्वज) चढ़ाया।
नामदेव ने समाज को संबोधित करते हुए कहा कि बाबा का संदेश “मनखे-मनखे एक समान” भारत भूमि का शाश्वत और सनातन चिंतन है। इसी चिंतन में विश्व का कल्याण निहित है। इस दौरान गांव के प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं का सम्मान कर शिक्षा के प्रति उत्साह जगाया गया।
भाटा पारा में स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में संघ के घोष वादन के साथ गुरु घासी दास बाबा को समन समर्पित किया
बिलासपुर: भक्ति और समरसता का संगम
बिलासपुर के विभिन्न केंद्रों पर भक्तिमय माहौल रहा:
• महंत बाड़ा (जरहाभाठा): यहाँ प्रतिवर्षानुसार स्वयंसेवकों ने शोभायात्रा का भव्य स्वागत किया।
• 27 खोली शाखा: गुरु तेगबहादुर शाखा के स्वयंसेवकों ने कुदुदंड में महंत जी के सानिध्य में जैतखाम पूजन किया।
• अन्य स्थान: क्रांति नगर शाखा (तालापारा), मंगला बस्ती, मोपका (चिल्हाटी बस्ती) और उस्लापुर में भी स्वयंसेवकों ने श्रद्धापूर्वक वंदन किया।
रायपुर महानगर: भव्य स्वागत और आशीर्वाद
रायपुर में सामाजिक समरसता मंच द्वारा शोभायात्रा का जोरदार स्वागत किया गया। मध्य क्षेत्र संघचालक डॉ. पूर्णेन्दु सक्सेना ने पूज्य खुशवंत गुरु का आत्मीय स्वागत किया। गुरुजी ने भी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए डॉ. सक्सेना को पुष्पमाला पहनाकर अपना आशीर्वाद दिया, जो सामाजिक सद्भाव की एक सुंदर तस्वीर बनी।
सेवा और सेवा कार्य
• गिरौधपुरी धाम: कसडोल विकासखंड के स्वयंसेवकों ने श्रद्धालुओं के लिए खीर-पूरी का प्रसाद वितरित किया।
• विभिन्न स्थान: रायपुर, बलौदाबाजार, मुंगेली, लोहारा, कवर्धा, सेमरा भदौरा और पेंड्रा जैसे क्षेत्रों में भी जयंती के अवसर पर विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए।
यह जयंती कार्यक्रम केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग को एक साथ लाने का एक महा-अभियान साबित हुआ। बाबा गुरु घासीदास जी के आदर्शों पर चलते हुए संघ और समाज के इस साझा प्रयास ने यह सिद्ध कर दिया कि जब हम एक साथ खड़े होते हैं, तभी राष्ट्र समर्थ और समरस बनता है।
