अंबिकापुर, 27 दिसंबर । छत्तीसगढ़ का शिमला कहे जाने वाला मैनपाट इन दिनों सैलानियों से गुलजार है। सर्दियों की छुट्टियों और नववर्ष के जश्न को खास बनाने के लिए हर दिन हजारों पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं। कड़ाके की ठंड, खुली वादियां, रोमांचक गतिविधियां और शांत वातावरण मैनपाट को खास बना रहे हैं।
सरगुजा जिले का प्रसिद्ध पठारी पर्यटन स्थल मैनपाट सर्दियों में अपने पूरे शबाब पर है। यह छत्तीसगढ़ का सबसे ठंडा पाट क्षेत्र माना जाता है, जहां रात का न्यूनतम तापमान 2 डिग्री तक गिर जाता है। ठंडी हवाओं और खुले आसमान के बीच नए साल का स्वागत करने के लिए बड़ी संख्या में सैलानी यहां पहुंच रहे हैं।
मैनपाट की प्राकृतिक सुंदरता के साथ रोमांचक गतिविधियां भी पर्यटकों को आकर्षित कर रही हैं। कुदारीडीह क्षेत्र में पैरासेलिंग (पैरा-मोटर) और केसरा में पैरासेलिंग की सुविधा शुरू की गई है। समुद्र तल से करीब 1085 मीटर की ऊंचाई पर स्थित मैनपाट में सर्द हवाओं के बीच आसमान में उड़ान भरना सैलानियों के लिए यादगार अनुभव बन रहा है।
नाइट कैंपिंग इन दिनों मैनपाट का सबसे बड़ा आकर्षण बनी हुई है। खुले आसमान के नीचे रात बिताने के लिए करीब 600 टेंट लगाए गए हैं। मेहता प्वाइंट व्यू, कार्निवाल स्थल और कुनिया रोड पर बड़ी संख्या में टेंट लगाए गए हैं। टेंट परिसरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है, जहां सैलानी अलाव के पास बैठकर संगीत और ठंड का आनंद ले रहे हैं।
कैंपिंग शुल्क 500 से 1000 रुपये तक रखा गया है। 1000 रुपये वाले पैकेज में भोजन की सुविधा भी दी जा रही है। इसके साथ ही मैनपाट में होम-स्टे की व्यवस्था भी शुरू की गई है, जहां पहाड़ी घरों में एक कमरे का किराया 1000 से 1500 रुपये के बीच है।
मैनपाट में ठहरने के लिए शासकीय मोटल के साथ-साथ कई निजी होटल और रिसॉर्ट उपलब्ध हैं। शासकीय मोटल और शैला रिसॉर्ट की ऑनलाइन बुकिंग होती है। करमा एथनिक रिसॉर्ट में सैलानियों के लिए प्रतिदिन छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य का आयोजन किया जा रहा है। नए साल के कारण अधिकांश होटल 2 जनवरी तक फुल बुक हैं और कई जगहों पर किराए में बढ़ोतरी भी हुई है।
मैनपाट के आसपास 22 से 25 किलोमीटर की परिधि में कई दर्शनीय स्थल स्थित हैं। टाइगर प्वाइंट, फिश प्वाइंट, दलदली, उल्टा पानी, परपटिया सनसेट व्यू, तिब्बती मठ और कैंप, मेहता प्वाइंट तथा टांगीनाथ मंदिर प्रमुख आकर्षण हैं। सभी स्थलों तक पहुंचने के लिए पक्की सड़कें उपलब्ध हैं।
यहां का उल्टा पानी स्थल पर्यटकों को खासा हैरान करता है, जहां पानी पहाड़ की ऊपरी दिशा में बहता हुआ नजर आता है। वहीं दलदली क्षेत्र में धरती के हिलने का अनुभव सैलानियों के लिए रोमांच का केंद्र है। घने साल वनों के बीच स्थित यह स्थान बच्चों और युवाओं को खासा पसंद आ रहा है।
मैनपाट में तिब्बती समुदाय के सात कैंप भी सैलानियों के आकर्षण का केंद्र हैं। हवा में लहराते प्रार्थना झंडे, बौद्ध मठ और शांत वातावरण यहां आने वालों को अलग ही सुकून का एहसास कराते हैं।
कैसे पहुंचें मैनपाट:
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से मैनपाट की दूरी करीब 390 किलोमीटर है। अंबिकापुर से यह लगभग 55 किलोमीटर दूर है। अंबिकापुर-रायगढ़ मार्ग से सड़क के जरिए मैनपाट आसानी से पहुंचा जा सकता है। नजदीकी रेलवे स्टेशन अंबिकापुर है, जबकि सबसे नजदीकी हवाई अड्डा रायपुर स्थित स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डा है।
