रायपुर, 19 जनवरी । छत्तीसगढ़ कांग्रेस में सृजन कार्यक्रम के तहत संगठनात्मक बदलाव की प्रक्रिया तेज हो गई है, लेकिन ब्लॉक अध्यक्षों की नई सूची ने पार्टी के भीतर असंतोष को जन्म दे दिया है। कुछ स्थानों पर पुराने चेहरों की पुनर्नियुक्ति और स्थानीय समीकरणों की अनदेखी को लेकर जिला स्तर से लेकर कार्यकर्ता स्तर तक सवाल उठ रहे हैं।
जिला अध्यक्षों की नियुक्ति के बाद कांग्रेस ने ब्लॉक अध्यक्षों की सूची भी जारी कर दी है। हालांकि सूची सामने आते ही कई जिलों में असहमति और नाराजगी के संकेत मिलने लगे हैं। सूरजपुर जिला अध्यक्ष शशि सिंह ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज को पत्र लिखकर आपत्ति दर्ज कराई है, जबकि अन्य जिलों में वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष चर्चा का विषय बन गया है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार ब्लॉक अध्यक्षों की यह सूची छत्तीसगढ़ प्रभारी सचिन पायलट की मंजूरी के बाद जारी की गई है। इसी वजह से इसमें बदलाव की संभावना बेहद कम मानी जा रही है और कार्यकर्ता खुलकर प्रतिक्रिया देने से बच रहे हैं।
बिलासपुर में सबसे ज्यादा असंतोष
ब्लॉक अध्यक्षों की सूची को लेकर बिलासपुर जिले में राजनीतिक तापमान अधिक है। यहां पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट के आधार पर सूची तैयार किए जाने का दावा किया गया, लेकिन इसके बावजूद विसंगतियां सामने आ रही हैं। सीपत ब्लॉक में राजेंद्र धीवर को तीसरी बार अध्यक्ष बनाए जाने से स्थानीय कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। उनका कहना है कि बार-बार एक ही चेहरे को मौका देने के बजाय नए नेतृत्व को अवसर मिलना चाहिए था।
हालांकि सभी नियुक्तियों को लेकर विरोध नहीं है। मस्तूरी में सरपंच भोला साहू को ब्लॉक अध्यक्ष बनाए जाने पर अब तक किसी तरह की असहमति सामने नहीं आई है।
पूर्व विधायक परिवार को प्राथमिकता का आरोप
बिल्हा ब्लॉक में पूर्व विधायक सियाराम कौशिक के परिवार की सदस्य गीतांजलि कौशिक को ब्लॉक अध्यक्ष बनाए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि जिले में केवल एक महिला को ब्लॉक अध्यक्ष बनाया गया और उसमें भी विधायक परिवार को प्राथमिकता दी गई। उनका तर्क है कि यदि संगठन में सक्रिय महिलाओं को आगे बढ़ाया जाता, तो महिला कांग्रेस को मजबूती मिल सकती थी।
जातीय संतुलन पर भी उठे सवाल
ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति में जातीय समीकरण को लेकर भी असंतुलन की बात सामने आ रही है। मस्तूरी और बिल्हा दोनों ब्लॉकों में ओबीसी वर्ग को जिम्मेदारी दी गई है, जबकि शहर और ग्रामीण बिलासपुर, तखतपुर और कोटा में सामान्य वर्ग के पांच ब्लॉक अध्यक्ष बनाए गए हैं। जिले में कहीं भी अनुसूचित जाति वर्ग से ब्लॉक अध्यक्ष नहीं बनाया गया है और केवल बेलगहना में एक अनुसूचित जनजाति वर्ग के नेता को मौका मिला है।
स्थानीय समीकरणों की अनदेखी का आरोप
स्थानीय नेताओं का कहना है कि जिला अध्यक्षों की राय नहीं लेने का असर आगे संगठनात्मक कामकाज में दिख सकता है। उदाहरण के तौर पर जूना बिलासपुर, जिसे संघ का प्रभाव क्षेत्र माना जाता है, वहां परंपरागत रूप से ब्राह्मण नेतृत्व रहा है, लेकिन इस बार मुस्लिम नेता को ब्लॉक अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं शहर के उस ब्लॉक में, जहां मुस्लिम और ईसाई मतदाता अधिक हैं, वहां ब्राह्मण नेता को जिम्मेदारी दी गई है।
इन फैसलों को लेकर पार्टी के भीतर मंथन तेज है। आने वाले दिनों में यह असंतोष संगठन पर कितना असर डालेगा, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।
