नई दिल्ली, 24 जनवरी । प्रख्यात विचारक और लेखक पुरुषोत्तम अग्रवाल की नई पुस्तक ‘मजबूती का नाम महात्मा गांधी : अहिंसा, सत्य और धर्म’ का लोकार्पण शनिवार को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (आईआईसी) में किया गया। राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित यह पुस्तक गांधी को ‘मजबूरी’ नहीं, बल्कि नैतिक और वैचारिक ‘मजबूती’ के रूप में देखने का आग्रह करती है।
कार्यक्रम की शुरुआत में राजकमल प्रकाशन समूह के अध्यक्ष अशोक महेश्वरी ने कहा कि राजकमल प्रकाशन निरंतर गांधी और उनके विचारों को नए संदर्भों में समझने वाली पुस्तकों का प्रकाशन करता रहा है और यह कृति उसी परंपरा की एक सशक्त कड़ी है।
इसके पश्चात सुप्रसिद्ध हिन्दुस्तानी शास्त्रीय गायिका शिवांगिनी द्वारा भजन-गायन प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में महात्मा गांधी के पौत्र और वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक राजमोहन गांधी ने वीडियो संदेश के माध्यम से कहा कि हमले, गालियां और गोलियां नेहरू को चोट नहीं पहुंचा सकतीं, लेकिन वे देश और उसकी एकता को अवश्य क्षति पहुंचा सकती हैं।
इसके बाद कवि-चिंतक अशोक वाजपेयी ने लेखक पुरुषोत्तम अग्रवाल से संवाद किया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक हमारे समय की चुनौतियों को संबोधित करती है। संवाद के दौरान गांधी-विचार, अहिंसा की वैचारिक दृढ़ता तथा धर्म और करुणा के आपसी संबंधों पर विस्तार से चर्चा हुई।
लेखक पुरुषोत्तम अग्रवाल ने कहा कि गांधी अपरिभाष्य नहीं, बल्कि तपस्वी हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि समाज तपस्या का सम्मान करता है, लेकिन तपस्वी का मूल्यांकन उसके नैतिक आचरण और नैतिक कसौटी पर ही किया जाना चाहिए।
पुस्तक समकालीन समय में एक महत्वपूर्ण बौद्धिक हस्तक्षेप के रूप में सामने आती है, जब देश और धर्म को हिंसा के माध्यम से परिभाषित किया जा रहा है। यह कृति गांधी की अहिंसा, सत्य और नैतिकता की प्रासंगिकता को नए सिरे से रेखांकित करती है।
