05 फरवरी । यूक्रेन और रूस के वार्ताकारों ने आज अबू धाबी में अमेरिका की मध्यस्थता में वार्ता का दूसरा दौर शुरू किया, जिसका उद्देश्य चार साल से चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के संभावित रास्ते तलाशना है। दो दिवसीय त्रिपक्षीय बैठक में यूक्रेनी, रूसी और अमेरिकी अधिकारी द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूरोप के सबसे बड़े संघर्ष को रोकने के नए प्रयास में एक साथ आए हैं, जिसमें लाखों लोग मारे गए हैं, लाखों विस्थापित हुए हैं और पूर्वी और दक्षिणी यूक्रेन का अधिकांश भाग तबाह हो गया है।
यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व राष्ट्रीय सुरक्षा एवं रक्षा परिषद के सचिव रुस्तम उमेरोव कर रहे हैं। रूसी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सैन्य खुफिया प्रमुख इगोर कोस्त्युकोव कर रहे हैं। अमेरिका ने स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर सहित अन्य दूतों को वार्ता में सहयोग हेतु भेजा है।
यह त्रिपक्षीय बैठक यूक्रेन के शहरों पर रूसी ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद हो रही है, जिसमें ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया और लाखों लोग कड़ाके की ठंड में बिजली और गर्मी से वंचित रह गए। राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने कहा कि रूस ने पिछले सप्ताह अमेरिका समर्थित ऊर्जा युद्धविराम का फायदा उठाकर गोला-बारूद का भंडार जमा किया और कल रिकॉर्ड संख्या में बैलिस्टिक मिसाइलों से यूक्रेन पर हमला किया।
दूसरी ओर, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इस बात पर जोर दिया कि रूस का विशेष सैन्य अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक कीव मॉस्को की मांगों को पूरा नहीं कर देता।
पूर्वी यूक्रेन में क्षेत्रीय विवाद मुख्य मुद्दा बना हुआ है। मॉस्को की मांग है कि कीव डोनबास के कुछ हिस्सों से, जिनमें भारी किलेबंदी वाले शहर और संसाधन संपन्न क्षेत्र शामिल हैं, अपनी सेना वापस बुला ले और आक्रमण में कब्जा की गई भूमि को रूसी भूमि के रूप में मान्यता दे। कीव ने किसी भी एकतरफा वापसी से इनकार कर दिया है और जोर देकर कहा है कि सीमा रेखा स्थिर रहनी चाहिए। रूस वर्तमान में यूक्रेन के लगभग 20 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा किए हुए है, जबकि कीव अभी भी डोनेट्स्क और अन्य विवादित क्षेत्रों के कुछ हिस्सों पर नियंत्रण रखता है।
