रायगढ़, 12 फ़रवरी । यूनियनों और किसान संगठनों द्वारा नए श्रम संहिता के विरोध में गुरुवार को आहूत देशव्यापी भारत बंद का जिले में आंशिक प्रभाव देखने को मिला है। जिले में जनजीवन सामान्य रूप से संचालित रहा, हालांकि कुछ क्षेत्रों में बंद का असर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया है।
वहीं शहर के अधिकांश बाजार, दुकानें और निजी प्रतिष्ठान खुले रहे। स्कूल भी सामान्य रूप से संचालित होने की संभावना है। हालांकि बंद के आह्वान के कारण कुछ इलाकों में व्यापारिक गतिविधियां अपेक्षाकृत धीमी रही हैं।
रायगढ़ जिले की एसईसीएल की प्रमुख कोयला खदानें—छाल, जामपाली, बरौद और बेजारी—बंद रखी गई है। इसके चलते कोयला उत्पादन और परिवहन पूरी तरह ठप है, जिससे औद्योगिक गतिविधियों पर असर पड़ने की संभावना है।
बैंकिंग यूनियनों के हड़ताल में शामिल होने से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में कामकाज प्रभावित हो सकता है। हालांकि एटीएम और डिजिटल बैंकिंग सेवाएं चालू रहने की उम्मीद है, जिससे आम उपभोक्ताओं को आंशिक राहत मिल सकती है।
उल्लेखनीय है कि नए लेबर कोड के विरोध में 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों (जैसे इंटक, एआईटीयूसी, सीटू) का गठबंधन चार नए लेबर कोड का विरोध कर रहा है, जिन्होंने पिछले साल 29 पुराने श्रम कानूनों की जगह ली थी। यूनियनों का आरोप है कि यह कोड श्रमिकों के अधिकारों को कमजोर करते हैं और कंपनियों के लिए कर्मचारियों को नौकरी से निकालना आसान बनाते हैं।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता : किसान संगठनों (संयुक्त किसान मोर्चा) ने इस अंतरिम व्यापार सौदे के खिलाफ बंद का आह्वान किया है। उनका मानना है कि अमेरिकी कृषि और डेयरी उत्पादों पर आयात शुल्क कम करने से भारतीय किसानों की आजीविका को खतरा होगा।
निजीकरण और आर्थिक नीतियां: हड़ताल सरकारी संपत्तियों के निजीकरण, बिजली (संशोधन) विधेयक 2025, और बीज विधेयक 2025 जैसी नीतियों के खिलाफ है।
इसी के साथ अन्य प्रमुख मांगों में प्रदर्शनकारी पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) की बहाली, मनरेगा के तहत बेहतर सुरक्षा और रुकी हुई मजदूरी बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
