CHENNAI, INDIA DECEMBER 22: Indian deep ocean exploration vehicle under development as part of Samudrayaan (Ocean Craft) program a part of deep ocean mission, seen on December 22, 2022 at the National Institute Of Ocean Technology Institute, Chennai, India. The metallic sphere is called Matysa 6000 and it is estimated it can travel to six kilometres below the sea surface. The endeavour is to explore the Indian Ocean to tap and mine the polymetallic sea nodules, the nickel, manganese and cobalt rich mineral deposits and to explore the biodiversity. Indian scientists are working to complete it as soon as possible. The pressurised crew module can accommodate three crew. (Photo by Pallava Bagla/Corbis via Getty Images)
केंद्र सरकार के डीप ओशन मिशन के तहत गहरे समुद्र में खनन और वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की गई हैं। यह जानकारी पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में दी।
उन्होंने बताया कि डीप ओशन मिशन के तहत छह प्रमुख क्षेत्रों पर काम किया जा रहा है, जिनमें गहरे समुद्र में खनन तकनीक का विकास, समुद्री जलवायु सेवाएं, समुद्री जैव विविधता का अध्ययन, गहरे समुद्र का सर्वेक्षण, समुद्र से ऊर्जा और मीठे पानी का उत्पादन तथा समुद्री जीवविज्ञान के लिए उन्नत अनुसंधान केंद्र की स्थापना शामिल हैं।
मत्स्य-6000 पनडुब्बी का विकास
भारत की मानवयुक्त पनडुब्बी मत्स्य-6000 का डिजाइन और सिस्टम इंजीनियरिंग पूरा कर लिया गया है। यह पनडुब्बी तीन वैज्ञानिकों के साथ 6000 मीटर गहराई तक जा सकेगी। इसके परीक्षण चेन्नई के कटुपल्ली स्थित एल एंड टी हार्बर में किए गए हैं।
समुद्र में वैज्ञानिक खोज
डीप ओशन मिशन के तहत भारतीय समुद्री क्षेत्र से लगभग 1,845 गहरे समुद्री सूक्ष्मजीवों को अलग किया गया है। इनमें कुछ दुर्लभ सूक्ष्मजीव ऐसे भी हैं जो पहले भारतीय महासागर में दर्ज नहीं किए गए थे।
कोच्चि स्थित समुद्री जीव संसाधन एवं पारिस्थितिकी केंद्र ने लक्षद्वीप और अंडमान-निकोबार क्षेत्र में 25 समुद्री पर्वतों का सर्वेक्षण किया, जहां 195 गहरे समुद्री प्रजातियों का दस्तावेजीकरण किया गया।
समुद्र तल पर हाइड्रोथर्मल वेंट की पहचान
गोवा स्थित राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं समुद्री अनुसंधान केंद्र ने स्वायत्त पानी के नीचे चलने वाले वाहन के जरिए दो सक्रिय और दो निष्क्रिय हाइड्रोथर्मल वेंट की पहचान की है।
समुद्री अवलोकन प्रणाली मजबूत
हैदराबाद स्थित भारतीय राष्ट्रीय समुद्री सूचना सेवा केंद्र ने अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में 11 ग्लाइडर मिशन पूरे किए हैं। इसके अलावा भारतीय महासागर में 60 वेव स्पेक्ट्रा ड्रिफ्टर और 92 आर्गो फ्लोट भी तैनात किए गए हैं।
समुद्र तल खनन प्रणाली का परीक्षण
समुद्र तल से पॉलीमेटालिक नोड्यूल एकत्र करने वाली खनन प्रणाली विकसित की गई है। इसका परीक्षण 5,270 मीटर गहराई पर किया जा चुका है।
सहव पोर्टल लॉन्च
2025 में सहव पोर्टल शुरू किया गया, जो समुद्री डेटा तक वास्तविक समय में पहुंच उपलब्ध कराता है। इससे जलवायु पूर्वानुमान, समुद्री संसाधन प्रबंधन और आपदा चेतावनी प्रणाली को मजबूती मिलेगी।
सरकार के अनुसार अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में वाणिज्यिक समुद्री खनन अभी शुरू नहीं हुआ है और इसके लिए अंतरराष्ट्रीय समुद्री प्राधिकरण द्वारा पर्यावरण मानकों और नियमों का ढांचा तैयार किया जा रहा है।
