नई दिल्ली, 1 फ़रवरी । अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) ने भारत के पूर्व अंतरराष्ट्रीय फुटबॉलर परिमल डे के निधन पर शोक व्यक्त किया है, जिनका बुधवार को कोलकाता में 81 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
1960 के दशक में डे ने भारत के लिए पांच मैच खेले। देश के लिए उनका एकमात्र गोल कुआलालंपुर में 1966 मर्डेका कप के कांस्य पदक मैच में कोरिया गणराज्य के खिलाफ आया।
एआईएफएफ के अध्यक्ष कल्याण चौबे ने अपने शोक संदेश में कहा, “भारत के पूर्व स्टार परिमल डे का निधन भारतीय फुटबॉल के लिए एक बड़ी क्षति है। जांगला-दा, जैसा कि हम उन्हें जानते थे, 1960 के दशक के सर्वश्रेष्ठ योजनाकारों में से एक थे, प्रशंसकों के दिलों और दिमाग में अभी भी हैं। मेरी संवेदना उनके परिवार औऱ दोस्तों के लिए हैं। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे।”
महासचिव डॉ शाजी प्रभाकरन ने कहा, “परिमल डे के निधन से पूरी भारतीय फुटबॉल बिरादरी बेहद सदमे में है। उनके परिवार के प्रति मेरी संवेदना है। उनकी आत्मा को शांति मिले।”
घरेलू स्तर पर, डे को 1962 और 1969 में दो बार संतोष ट्रॉफी जीतने का गौरव प्राप्त हुआ।
ईस्ट बंगाल के लिए फॉरवर्ड के रूप में खेलने के बाद, उन्होंने 84 गोल किए और 1968 में क्लब की कप्तानी भी की। डे के पास 1966, 1970 और 1973 में तीन बार कलकत्ता फुटबॉल लीग (सीएफएल) और आईएफए शील्ड जीतने का गौरव है।
बीएनआर (1966) और ईरानी पक्ष पीएएस क्लब (1970) के खिलाफ दो आईएफए शील्ड फाइनल में स्कोर करके उन्होंने भारतीय फुटबॉल इतिहास में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों से लिखवा लिया।
1966 का सीएफएल, डे के लिए एक बड़ा टूर्नामेंट था क्योंकि उन्होंने पहले नौ मैचों में से प्रत्येक में गोल किया था। इनके अलावा, डे ने अन्य टूर्नामेंटों में डूरंड कप (1967, 1970) और रोवर्स कप (1967, 1969, 1973) भी जीता है। डे 1971 में मोहन बागान के लिए भी खेले और उस साल फिर से रोवर्स कप जीता।
4 मई, 1941 में जन्मे डे को सक्रिय फुटबॉल से संन्यास लेने के बाद 2019 में पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा बंग भूषण की उपाधि से सम्मानित किया गया था।
