Oplus_16908288
11 अप्रैल। केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने नई दिल्ली में समुद्री खाद्य निर्यातकों की बैठक 2026 की अध्यक्षता की। इस दौरान वैश्विक बाजारों तक पहुंच बढ़ाने और निर्यात को मजबूत करने की रणनीति तैयार की गई।
मूल्य-वर्धित निर्यात और समुद्री क्षमता पर जोर
बैठक में मंत्री ने कहा कि भारत मूल्य-वर्धित समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ाएगा और विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) तथा खुले समुद्र की क्षमता का बेहतर उपयोग करेगा। साथ ही निर्यातकों के लिए बुनियादी ढांचा और सुविधाएं विकसित करने पर बल दिया गया।
निर्यातकों के लिए क्षमता निर्माण पर जोर
मंत्री ने समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण से निर्यातकों के समर्थन के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को मजबूत करने का आग्रह किया, ताकि अनुपालन, प्रतिस्पर्धा और निर्यात तैयारी को बढ़ाया जा सके।
चुनौतियों और अवसरों पर हुई चर्चा
बैठक में हितधारकों ने कई अहम मुद्दे उठाए, जिनमें कैच सर्टिफिकेट प्रक्रिया को सरल बनाना, अंडमान-निकोबार में समुद्री शैवाल की खेती के लिए अनुमति सुविधा, और उच्च गुणवत्ता वाले फिश फीड के वैज्ञानिक विकास की जरूरत शामिल रही।
इसके अलावा टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाएं, उच्च लागत, कोल्ड चेन की कमी और गुणवत्ता आश्वासन प्रणाली जैसी चुनौतियों पर भी चर्चा हुई।
कई संस्थाओं और राज्यों की भागीदारी
बैठक में राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड, नाबार्ड, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम सहित कई संस्थानों और राज्यों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
निर्यात में लगातार वृद्धि, झींगा का बड़ा योगदान
पिछले 11 वर्षों में भारत के समुद्री खाद्य निर्यात में औसतन 7% वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। यह 2013-14 के 30,213 करोड़ रुपए से बढ़कर 2024-25 में 62,408 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। इसमें झींगा निर्यात का सबसे बड़ा योगदान रहा है।
130 से अधिक देशों में पहुंच, अमेरिका सबसे बड़ा बाजार
भारत 350 से अधिक समुद्री उत्पादों का निर्यात करीब 130 देशों में करता है। इसमें अमेरिका सबसे बड़ा बाजार है, जहां कुल निर्यात का 36.42% हिस्सा जाता है। इसके बाद चीन, यूरोपीय संघ, जापान और मध्य-पूर्व के देश प्रमुख बाजार हैं।
विविधीकरण और बुनियादी ढांचे पर सरकार का फोकस
सरकार निर्यात टोकरी को विविध बनाने और वैश्विक बाजार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने पर काम कर रही है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत उत्पादन, तकनीक, ट्रेसबिलिटी और कोल्ड चेन जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाया जा रहा है।
