भारत ने लिपुलेख दर्रे पर नेपाल के दावे को खारिज करते हुए कहा है कि यह दर्रा 1954 से कैलाश मानसरोवर यात्रा का एक पुराना मार्ग है और इस मार्ग से दशकों से यात्रा होती आ रही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में यह बात कही। उन्होंने यह जवाब वार्षिक कैलाश मानसरोवर यात्रा के संदर्भ में नेपाल के विदेश मंत्रालय द्वारा सीमा संबंधी दावों के जवाब में दिया।
उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस संबंध में भारत का रुख़ हमेशा से एक जैसा और स्पष्ट रहा है और यह कोई नई बात नहीं है। श्री जायसवाल ने बताया कि भारत हमेशा से यह कहता आया है कि ऐसे दावे न तो न्यायसंगत हैं और न ही ऐतिहासिक तथ्यों और सबूतों पर आधारित हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि क्षेत्रीय दावों का इस तरह का एकतरफ़ा कृत्रिम विस्तार अस्वीकार्य है। प्रवक्ता ने आगे कहा कि भारत द्विपक्षीय संबंधों के सभी मुद्दों पर नेपाल के साथ रचनात्मक बातचीत के लिए तत्पर है, जिसमें बातचीत और कूटनीति के माध्यम से सहमत लंबित सीमा मुद्दों का समाधान भी शामिल है।
