काठमांडू, 01 जून । नेपाल के निजी शिक्षण संस्थानों के संचालक और अभिभावक संघ ने निजी विद्यालयों में विद्यार्थियों की फीस पर 3 प्रतिशत ‘शिक्षा समता शुल्क’ लगाने के सरकारी निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
सरकार ने आर्थिक वर्ष 2026-27 के बजट में निजी विद्यालयों के विद्यार्थियों से वसूले जाने वाले सभी प्रकार के शुल्क पर 3 प्रतिशत शिक्षा समता शुल्क लगाने की घोषणा की थी। इस निर्णय का प्रभाव लगभग 26 लाख विद्यार्थियों के अभिभावकों पर पड़ने वाला है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देशभर के 8,941 निजी विद्यालयों में 26 लाख 57 हजार 170 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। अभिभावक संगठनों का कहना है कि यह नीति लाखों परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालेगी, इसलिए इसे लागू नहीं किया जाना चाहिए।
इस पर निजी विद्यालय संचालक संघ ने एक बयान में कहा कि सामुदायिक विद्यालयों पर विश्वास न होने के कारण अपने परिवार की जरूरतों में कटौती कर बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाने के लिए निजी विद्यालयों में पढ़ाने वाले लाखों अभिभावकों पर यह 3 प्रतिशत कर अतिरिक्त बोझ साबित होगा। अभिभावक संघ ने कहा कि निजी विद्यालयों की पहले से ही ऊंची फीस है और उस पर अतिरिक्त कर लगाने से अभिभावकों की आर्थिक कठिनाइयां और बढ़ेंगी। इसलिए सरकार को इस निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए।
अभिभावक महासंघ की सदस्य रमा गिरी ने सरकार के इस कदम को गलत बताते हुए कहा कि यह निर्णय अभिभावकों पर अतिरिक्त भार डालने वाला और जनता विरोधी है। ऐसे भी कई अभिभावक हैं जो प्रतिदिन केवल 1,000 रुपये कमाकर अपने बच्चों को निजी विद्यालयों में पढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन अभिभावकों को अपने परिवार का गुजारा चलाने में ही कठिनाई हो रही है, वे यह अतिरिक्त कर नहीं चुका पाएंगे। सरकार को यह निर्णय वापस लेना चाहिए।
