भारतीय भाषा आंदोलन और स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में 3 जून का दिन विशेष महत्व रखता है। वर्ष 1918 में इसी दिन इंदौर में आयोजित हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अधिवेशन में हिन्दी को देश की राष्ट्रभाषा के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया था।
इस सम्मेलन की अध्यक्षता राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने की थी। अधिवेशन में हिन्दी को भारत की साझा भाषा और भावी राष्ट्रभाषा के रूप में स्वीकार करने का प्रस्ताव पारित किया गया। उस समय देश स्वतंत्रता आंदोलन के दौर से गुजर रहा था और भारतीय भाषाओं को राष्ट्रीय पहचान से जोड़ने की मांग जोर पकड़ रही थी।
महात्मा गांधी का मानना था कि देश की एकता और जनसंपर्क के लिए ऐसी भाषा की आवश्यकता है जिसे देश के अधिकांश लोग समझ सकें। उन्होंने हिन्दी और हिंदुस्तानी को जनता की भाषा बताते हुए इसके व्यापक प्रयोग का समर्थन किया। इंदौर सम्मेलन में पारित प्रस्ताव ने हिन्दी आंदोलन को नई ऊर्जा प्रदान की और इसे राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक समर्थन मिला।
भाषाई स्वाभिमान और राष्ट्रीय चेतना के प्रतीक के रूप में यह निर्णय आगे चलकर भारतीय संविधान निर्माण की बहसों में भी महत्वपूर्ण आधार बना। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद संविधान सभा में भाषा संबंधी चर्चाओं के दौरान हिन्दी को राजभाषा बनाने का विचार प्रमुखता से उभरा।
अंततः 26 जनवरी 1950 को लागू हुए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343 के तहत हिन्दी (देवनागरी लिपि) को भारत संघ की राजभाषा घोषित किया गया। इस प्रकार 1918 के इंदौर सम्मेलन में उठी आवाज ने स्वतंत्र भारत की भाषा नीति को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
महत्वपूर्ण घटनाचक्र
1918 – गांधी जी की अध्यक्षता इन्दौर में ‘हिन्दी साहित्य सम्मेलन’ आयोजित हुआ और उसी में पारित एक प्रस्ताव के द्वारा हिन्दी राजभाषा मानी गयी।
1947 – ब्रिटिश सरकार ने भारत के विभाजन की औपचारिक योजना की घोषणा की। इसे “3 जून योजना” या “माउंटबेटन योजना” के नाम से जाना जाता है।
1950 – भारत को पहली बार विश्व कप फुटबॉल में आमंत्रण।
1965 – एडवर्ड ह्वाइट बने अंतरिक्ष में चहलकदमी करने वाले पहले अमेरिकी।
1972 – भारत और पाकिस्तान के बीच ‘शिमला समझौता’ का आरंभिक खाका तैयार।
1994 – भारत सहायता क्लब का नया नाम ‘भारत सहायता मंच’ किया गया।
1999 – हावरक्राफ्ट विमानों के अविष्कारक क्रिसटोफ़र काकरैल का निधन, यूगोस्लाविया द्वारा कोसोवो शांति योजना को मंजूरी, मिस्र के राष्ट्रपति हुश्नी मोबारक लगातार चौथी बार राष्ट्रपति चुने गये।
2004 – केन फोर्ड नासा के अंतरिक्ष खोज पैनल के नेतृत्वकर्ता बने।
2005 – फ्रांस ने सुरक्षा परिषद में भारत की दावेदारी का समर्थन दुहराया।
2008 – तेलंगाना राष्ट्र समिति के अध्यक्ष के. चन्द्रशेखर राव ने उपचुनाव में हार के बाद अपने पर से इस्तीफा दिया।
2008 – केन्द्र सरकार ने सीमेंट निर्यात पर रिफंड को दी गई मंजूरी वापस ली।
2008 – जापानी प्रयोगशाला के साथ अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का डिस्कवरी यान अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचा। वैज्ञानिकों को सौर परिवार के बाहर अब तक का सबसे छोटा ग्रह मिला।
जन्म
1844 – बालकृष्ण भट्ट – आधुनिक हिन्दी साहित्य के शीर्ष निर्माताओं में से एक।
1867 – हरविलास शारदा – भारत के प्रसिद्ध शिक्षाविद, राजनेता, समाज सुधारक, न्यायविद और लेखक थे।
1895 – पणीक्कर, के. एम. – मैसूर (कर्नाटक) के प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ, राजनीयक और विद्वान।
1901 – गोविंद शंकर कुरुप – ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित मलयाली भाषा के प्रसिद्ध साहित्यकार।
1912 – सोहराब फिरोजशाह गोदरेज – प्रसिद्ध भारतीय व्यवसायी, उद्यमी और गोदरेज समूह के अध्यक्ष थे।
1924 – एम. करुणानिधि – भारतीय राजनेता और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री थे।
1929 – चिमनभाई पटेल – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राजनीतिज्ञ थे, जो गुजरात के भूतपूर्व मुख्यमंत्री थे।
1930 – जॉर्ज फर्नांडिस – एक पूर्व ट्रेड यूनियन नेता थे, जो राजनेता, पत्रकार और भारत के रक्षामंत्री रहे।
1941 – रूमा पाल – भारत की प्रसिद्ध महिला न्यायधीश रही हैं।
1970 – तालारी रंगैय्या – आंध्र प्रदेश के राजनीतिज्ञ हैं।
1982 – तृप्ति मुर्गंडे – भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी हैं जो एकल और युगल खेलती हैं।
निधन
1925 – वी. वी. सुब्रमण्य अय्यर – एक स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी राष्ट्रभक्त थे।
1974- कृष्ण बल्लभ सहाय – बिहार के मुख्यमंत्री एवं स्वतंत्रता सेनानी।
1976 – विगगो कैंपमैन – प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ थे जो डेनमार्क के सामाजिक डेमोक्रेट्स के नेता थे।
1976 – मुनि जिनविजय – प्राचीन भारतीय साहित्य के अन्वेषी, संपादक और पाठालोचक थे।
1994 – त्रिभुवनदास कृषिभाई पटेल – सामुदायिक नेतृत्व।
2011 – भजन लाल – हरियाणा के कुशल राजनीतिज्ञ तथा तीन बार के मुख्यमंत्री थे।
महत्वपूर्ण अवसर
– विश्व साइकिल दिवस।
