जगदलपुर, 19 जून । बस्तर जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत राशन वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। अब हितग्राहियों को घर बैठे राशन नहीं मिलेगा, बल्कि उचित मूल्य दुकान (राशन दुकान) पहुंचकर ई-पॉस मशीन में बायोमेट्रिक सत्यापन (अंगूठा) कराने के बाद ही चावल, शक्कर और गुड़ का वितरण किया जाएगा।
खाद्य विभाग ने फर्जी तरीके से राशन उठाने पर रोक लगाने और वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए जिले के सभी 485 राशन दुकानों में बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य कर दिया है। इसके साथ ही 10 वर्ष से अधिक उम्र के सभी राशन कार्डधारकों का ई-केवाईसी भी जरूरी होगा।
जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित 485 उचित मूल्य दुकानों के माध्यम से अंत्योदय, प्राथमिकता और अन्य श्रेणी के दो लाख से अधिक परिवारों को हर महीने सार्वजनिक वितरण प्रणाली का लाभ दिया जाता है। नई व्यवस्था के तहत अब ओटीपी आधारित सत्यापन को बंद कर दिया गया है और उसकी जगह न्यूट्रल एंट्री और ई-पॉस मशीन के जरिए बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन को अनिवार्य किया गया है।
खाद्य विभाग के अनुसार, 10 साल से अधिक उम्र के सभी राशन कार्ड सदस्यों का ई-केवाईसी कराया जाना अनिवार्य होगा, जिन परिवारों का ई-केवाईसी अभी तक पूरा नहीं हुआ है, उन्हें जल्द प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी गई है। इससे राशन कार्ड का डेटा अपडेट होगा और वास्तविक पात्र हितग्राहियों की सही पहचान सुनिश्चित की जा सकेगी। पिछले कुछ समय में ऐसे मामले सामने आए थे, जिनमें परिवार के किसी सदस्य या मोबाइल नंबर पर भेजे गए ओटीपी के जरिए राशन वितरण किया जा रहा था। इससे गड़बड़ी और फर्जीवाड़े की आशंका बढ़ रही थी। इसे देखते हुए खाद्य विभाग ने राशन दुकानों पर निगरानी अभियान चलाया और अब घर बैठे राशन वितरण की सुविधा समाप्त कर दी है।
अधिकारियों के मुताबिक बुजुर्ग, दिव्यांग और विशेष परिस्थितियों वाले हितग्राहियों के लिए शासन के निर्धारित प्रावधानों के अनुसार आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि उन्हें राशन प्राप्त करने में परेशानी न हो। खाद्य विभाग का मानना है कि बायोमेट्रिक सत्यापन लागू होने से फर्जी राशन उठाने और बोगस लाभार्थियों पर प्रभावी रोक लगेगी। राशन केवल उसी व्यक्ति को मिलेगा, जिसका नाम राशन कार्ड में दर्ज होगा और जिसकी पहचान मशीन से सत्यापित होगी। इससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और सरकारी योजनाओं का लाभवास्तविक पात्र लोगों तक पहुंचेगा।
