एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत का सैन्य आधुनिकीकरण अब ऐसी लंबी दूरी की क्षमताएं विकसित करने पर ज़्यादा ध्यान दे रहा है जो चीन के भीतर तक लक्ष्य भेद सकें, साथ ही पाकिस्तान से जुड़ी सुरक्षा चुनौतियों का भी ध्यान रखा जा रहा है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के हालिया आकलन का हवाला देते हुए, निक्केई एशिया ने बताया कि चीन की बढ़ती सैन्य ताकत और पाकिस्तान के साथ उसके गहरे होते रणनीतिक संबंधों के बीच, रक्षा योजना में लंबी दूरी के हथियार प्रणालियों पर ज़्यादा ज़ोर दिया जा रहा है। रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि 2025 में भारत का सैन्य खर्च 7.5 प्रतिशत बढ़कर 92 अरब डॉलर हो गया, जिससे यह दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा सैन्य खर्च करने वाला देश बन गया है।
यह भी अनुमान है कि जनवरी 2026 तक भारत के पास लगभग 190 परमाणु हथियार (वॉरहेड) थे। रिपोर्ट के अनुसार, भारत की रणनीतिक योजना अब चीन को रोकने (deterrence) के उद्देश्य से क्षमताएं विकसित करने की ओर तेज़ी से बढ़ी है। जबकि भारत ने पहले 2,000 किलोमीटर तक की रेंज वाले परमाणु-सक्षम सिस्टम तैनात किए थे, अब उसने धीरे-धीरे ऐसी मिसाइलें शामिल की हैं जो 3,000 किलोमीटर और उससे अधिक दूर के लक्ष्यों को भेदने में सक्षम हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इस साल जनवरी तक भारत के पास 24 अग्नि-V परमाणु-सक्षम इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें थीं। इस मिसाइल की रेंज 5,000 किलोमीटर तक बताई जाती है। निक्केई एशिया के विश्लेषण में कहा गया है कि भारत का सैन्य आधुनिकीकरण चीन की बढ़ती सैन्य क्षमताओं और पाकिस्तान के साथ उसकी करीबी रक्षा साझेदारी को लेकर चिंताओं को दर्शाता है। इसमें आधुनिक युद्ध में ड्रोन, साइबर ऑपरेशन और सटीक प्रहार करने वाले हथियारों (precision-strike weapons) की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला गया है।
