नई दिल्ली, 26 जून। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की दिल्ली इकाई ने शुक्रवार को प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा की अध्यक्षता में एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा 1975 में आपातकाल लगाकर देश में लोकतंत्र की की गई हत्या को लेकर एक सेमिनार का आयोजन किया और 115 लोकतंत्र सेनानियों का अभिनंदन किया गया।
सेमिनार को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के साथ मुख्य वक्ता पूर्व केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, लोकतंत्र सेनानी एवं भाजपा संसदीय दल के सदस्य सत्यनारायण जटिया ने प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा की अध्यक्षता में सेमिनार को सम्बोधित किया।
सेमिनार की संचालन कमेटी के सदस्यों सांसद योगेन्द्र चांदोलिया, धर्मवीर शर्मा एवं देवेन्द्र सोलंकी के द्वारा संचालित कार्यक्रम में आज के कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष, मुख्यमंत्री, मुख्य वक्ता ने वरिष्ठ लोकतंत्र सेनानियों ओ.पी. बब्बर, नंदकिशोर गर्ग, लालबिहारी तिवारी, पी.के. चांदला, सुरेश गुप्ता, रामभज, करणसिंह तंवर, श्रवण कुमार, तिलकराज कटारिया, संजय भाटिया, राजन ढींगरा, जगमल प्रसाद आदि का अभिनंदन किया।
सांसद मनोज तिवारी, रामवीर सिंह बिधूड़ी, बांसुरी स्वराज और दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद ने भी कार्यक्रम में सम्मिलित होकर लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान किया।
इस मौके पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि 25 जून का संविधान हत्या दिवस भी इसलिए याद किया जाता है कि इतिहास में अगर देश के किसी नेता ने ऐसा करने की कोशिश की तो देश के 140 करोड़ लोग ऐसा होने नहीं देंगे।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि जो लोग जेब में संविधान लिए घूमते हैं और कहते हैं कि लोकतंत्र की हत्या हो रही है, ऐसे वाक्य कहने वाले लोग ये समझते हैं कि लोकतंत्र उनका दास है तो वह भारत के एक-एक लोकतंत्र सेनानी जो आपातकाल के दौरान जेल मे रहे का अपमान करते हैं। कांग्रेस सरकार ने जय प्रकाश नारायण को लोहे की जंजीरों में जकड़ा लेकिन उनके साहस को नहीं जकड़ पाए।
उन्होंने कहा कि अटल विहारी बाजपेयी जेल में बंद होने के बावजूद उनकी लेखनी काम करती रही और लाखों लोकतंत्र सेनानियों की आवाज बने।
रेखा गुप्ता ने अंत में कहा कि आज देश का सच्चा सपूत जो देश के प्रधानमंत्री के रुप में प्रधानसेवक बनकर हम सब की सेवा कर रहे हैं, वह लोकतंत्र सेनानियों की कुर्बानी को याद रखते हैं और देश में फिर कभी वैसी स्थिति ना बने, देश में लोकतंत्र का सम्मान हो, मीडियो को स्वतंत्रता मिले और हर एक नागरिक को अधिकार मिले, इस बात के लिए वह निरंरत प्रयासरत है।
इस मौके पर पूर्व केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि इतिहास की फितरत है वह दोहराता है और आपातकाल का इतिहास ना दोहराया जाए इसलिए आज प्रदेश अध्यक्ष के सानिध्य में यह कार्यक्रम आयोजित हो रहा है और इसमें खासकर युवाओं को बुलाया गया है ताकि वह हकीकत से परिचित हो और उन सेनानियों से मिले जिन्होंने आपातकाल की यातनाएं सही और उसके खिलाफ आवाज उठाई।
स्मृति ईरानी ने कहा कि आज के युवाओं को इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि आपातकाल में क्या हश्र किया गया।
पूर्व केन्द्रीय मंत्री ने केरल राज्य के मास्टर सी. सदानंदका उदहारण देते हुए कहा कि उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी को चैलेंज देने की दुस्साह करा उनके पैरों को काट दिया गया। उन्होंने कहा कि बंगाल चुनाव के बाद लोगों ने ऐसी कई कहानियां सुनाई जिसे लगता है कि उस समय कितना भयावय माहौल था।
ईरानी ने कहा कि आपातकाल के संबंध में जब भी चर्चा होती है तो यह जिक्र जरूर होता है कि एक करोड़ से ज्यादा नसबंदी हुई थी और यह तो सिर्फ वह आंकड़ा है जो लोगों के ध्यान में आया है। 2,20,000 लोगों को जेल में डाला गया। जॉर्ज फर्नांडिस को ढूंढने के लिए उनके भाई की हत्या कर दी गई।
उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान महिलाओं के साथ क्या क्या हुआ इसकी जिक्र तक नहीं है। औरतों के साथ किए गए अत्याचार को तो आपातकाल के इतिहास के पन्नो से ही हटा दिया गया। यह लोग जो आज महिलाओं की राजनीति की बात करते हैं, उन्हें उस वक्त पूछना चाहिए था कि आपातकाल के दौरान आपने औरतों के साथ क्या किया।
उन्होंने कहा कि औरतों को लेकर आज भी कांग्रेस और सहयोगी पार्टिंयों की मानसिकता सामने आई है जब बात 33 प्रतिशत आरक्षण की हुई तो इन्होंने इसका विरोध किया। आज एक प्रण लेना होगा कि जो पहले हुआ वह देश में कभी नहीं होगा।
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष एवं केन्द्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि आज संविधान हत्या दिवस का 51वां वर्ष है जब देश में लोकतंत्र का गला घोटा गया था और उस वक्त प्रेस की आजादी खत्म कर दी गई। व्यक्तियों के जो विशेषाधिकार थे, उसे खत्म कर दिया गया था, जितने भी गैर कांग्रेसी दल थे उनके कार्यकर्ताओं पर, सधारण जनता पर अत्याचार हुए थे। उन्होंने कहा कि आज इस संविधान हत्या दिवस की प्रासंगिकता सिर्फ यह नहीं कि पूर्व में कांग्रेस ने जो अत्याचार किए उसका वर्णन करना नहीं बल्कि आज की युवा पीढ़ी जिसने उस मंजर को नहीं देखा, वह भी इस बात को समझे कि उस वक्त कांग्रेस की मानसिकता क्या थी और आज जो संविधान की दुहाई देते हैं उन्होंने पूर्व में संविधान का गला कैसे घोंटा था।
हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि सिर्फ आपातकाल नहीं आपातकाल से पहले भी जो देश में चल रहा था उस वक्त भी जो अत्याचार हुए वह भी समझने और पढ़ने की जरूरत युवाओं को है। संविधान के अनुसार भी लोकतंत्र कितना महत्वपूर्ण है इसको इस बात से समझा जा सकता है कि उस वक्त एक ओर कांग्रेस की लोकतांत्रिक विरोधी मानसिकता थी और दूसरी ओर पंचनिष्ठाओं पर आधारित जनसंघ पार्टी जो राष्ट्र प्रथम की मानसिकता के साथ 22 राज्यों में कार्य कर रही है।
मल्होत्रा ने कहा कि आज यहां वरिष्ठ साथी बैठे हैं जिन्होंने स्वयं उस वक्त के अत्याचार को सहा और यातनाएं झेली। उन्होंने कहा कि आपातकाल हमें यह भी सिखाता है कि भारत का संविधान स्वंतत्र न्यायपालिका, स्वतंत्र प्रेस, सक्रिय नागरिक समाज और जागरुक जनता यह लोकतत्र के सबसे मजबूत स्तम्भ है।
