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धमतरी, 09 जुलाई । धमतरी शहर से लगे ग्राम पंचायत भटगांव में चारागाह की करीब 5 एकड़ भूमि को बकरी पालन परियोजना के लिए एक निजी संस्था को 11 वर्ष की लीज पर देने के प्रस्ताव का ग्रामीणों ने तीखा विरोध किया है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव की सार्वजनिक भूमि किसी भी निजी कंपनी को नहीं सौंपी जाएगी। इस मुद्दे को लेकर लगातार बैठकों का दौर चला, जिसमें प्रस्ताव को निरस्त करने पर सहमति बनी और ग्राम पंचायत की बैठक में भी इसका विरोध दर्ज कराया गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत में पहले से संचालित दीदी की रसोई, बुनकर संघ, खाद्य निर्माण, प्रसंस्करण तथा लेमनग्रास उत्पादन जैसी आजीविका आधारित गतिविधियों को बंद कर निजी संस्था को जमीन देने की प्रक्रिया शुरू की गई, जबकि इस संबंध में पंचायत का विधिवत प्रस्ताव नहीं लिया गया। उनका कहना है कि इन योजनाओं का निरीक्षण राज्य स्तर के मंत्री, विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा अन्य राज्यों से आने वाले प्रतिनिधि भी करते रहे हैं। ऐसे में सफलतापूर्वक संचालित गतिविधियों को रोकना उचित नहीं है।
मामले को लेकर ग्रामीणों और पंचों में नाराजगी बढ़ गई है। तीन दौर की बैठकों के बाद ग्रामीणों ने एकमत से प्रस्ताव निरस्त करने की मांग की। बुधवार को धमतरी तहसीलदार भी गांव पहुंचे और ग्रामीणों से चर्चा कर उनकी आपत्तियां सुनीं। वहीं सोमवार को पंचायत भवन में आयोजित सामान्य सभा की बैठक में भी प्रस्ताव को निरस्त करने का निर्णय लिया गया।
ग्रामीणों ने आज गुरुवार काे जानकारी देते हुए कहा कि यदि भविष्य में कोई निर्माण कार्य कराया जाना है तो पंचायत को ही एजेंसी बनाया जाए और भूमि पंचायत के अधीन ही रहे। यदि किसी संस्था को भूमि देना आवश्यक हो तो सीमित अवधि की लीज पर दिया जाए, लेकिन गांव की सार्वजनिक संपत्ति का दीर्घकालीन हस्तांतरण स्वीकार्य नहीं होगा। साथ ही उन्होंने दीदी की रसोई, बुनकर संघ, खाद्य निर्माण और प्रसंस्करण जैसे वर्तमान कार्यों को यथावत जारी रखने की मांग की है।
उल्लेखनीय है कि संबंधित संस्था ने प्रशासन को भेजे आवेदन में भटगांव रीपा केंद्र में बकरी पालन इकाई स्थापित करने का प्रस्ताव दिया था। आवेदन में दावा किया गया था कि इस परियोजना से स्थानीय महिलाओं, युवाओं और स्व-सहायता समूहों को रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर मिलेंगे, आय में वृद्धि होगी तथा पशुपालन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
प्रस्तावित अनुबंध को निरस्त किया जा रहा है:
सरपंच फागुराम साहू ने बताया कि ग्रामीणों के विरोध और गाँव वालों की भावना को देखते हुए प्रस्तावित अनुबंध को निरस्त करने का निर्णय लिया गया है। सोमवार को पंचायत भवन में हुई बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव पारित किया गया और शासन-प्रशासन को भी इसकी जानकारी भेज दी गई है।
