May 12, 2026

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नई दिल्ली, 12 मई। देश में मौसम पूर्वानुमान अब पहले से ज्यादा आधुनिक और सटीक होने जा रहा है। मंगलवार को पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित दो नई मौसम पूर्वानुमान सेवाओं की शुरुआत की। इन सेवाओं के जरिए अब लोगों को गांव और ब्लॉक, स्थानीय स्तर तक मानसून की सटीक जानकारी चार हफ्ते पहले मिल सकेगी। यह जानकारी हर बुधवार को जारी होगी। इसके साथ उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए विशेष सेवा की शुरुआत की है जिसके तहत उन्हें एक किलोमीटर के अंदर दस दिन पहले मौसम की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। इन प्रणालियों को भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी), भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम), पुणे और राष्ट्रीय मध्यम श्रेणी मौसम पूर्वानुमान केंद्र (एनसीएमआरडब्ल्यूएफ) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है।

इन दोनों सेवाओं की शुरुआत के मौके पर मंगलवार को मौसम विभाग के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्रा ने बताया कि पहला एआई सिस्टम मानसून के आगे बढ़ने का अनुमान 10 दिन पहले तक देगा। यानी अगर मानसून केरल में दस्तक देगा तो अगले 10 दिनों में मानसून किस-किस प्रदेश के कौन से गांव तक पहुंचेगा इसकी सटीक जानकारी लोगों को मिल सकेगी। इससे 16 राज्यों और 3000 से ज्यादा जिलों में किसानों और प्रशासन को समय रहते मौसम की जानकारी मिल सकेगी।

इसके अलावा उत्तर प्रदेश के लिए एक किलोमीटर रिजॉल्यूशन वाला हाई स्पेशियल रेनफॉल फोरकास्ट सिस्टम भी शुरू किया गया है। यह सिस्टम 10 दिन पहले तक बेहद सटीक बारिश का पूर्वानुमान देगा।

इस नई तकनीक में एआई, स्टैलाइट डेटा, डॉपलर रडार और ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन का इस्तेमाल किया गया है, जिससे मौसम पूर्वानुमान की सटीकता काफी बढ़ेगी।

इस अवसर पर केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत की मौसम पूर्वानुमान क्षमता में बड़ा सुधार हुआ है। लगभग डेढ़ दशक पहले देश में मुश्किल से 16 से 17 डॉप्लर मौसम रडार थे, जबकि अब इनकी संख्या बढ़कर लगभग 50 हो गई है और मिशन मौसम के तहत 50 और रडार लगाने की योजना है। अवलोकन नेटवर्क, स्वचालित मौसम स्टेशनों, उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग प्रणालियों और डिजिटल प्रसार प्लेटफार्मों के इस विस्तार से पूरे देश में मौसम पूर्वानुमान क्षमता और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों में काफी सुधार हुआ है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत में भीषण मौसम संबंधी घटनाओं के पूर्वानुमान की सटीकता में लगभग 40 प्रतिशत सुधार हुआ है। पिछले पांच वर्षों में चक्रवात के मार्ग, तीव्रता और भूस्खलन के 72 घंटों के पूर्वानुमान में लगभग 30 से 35 प्रतिशत का सुधार हुआ है, जबकि मौसमी पूर्वानुमान त्रुटियों में उल्लेखनीय कमी आई है।

डॉ. सिंह ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और चरम मौसम संबंधी घटनाओं में वृद्धि के कारण सटीक और समय पर पूर्वानुमान पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं।

मंत्री कहा कि मोदी सरकार ने देश में मौसम पूर्वानुमान और जलवायु सेवाओं के आधुनिकीकरण के लिए कई परिवर्तनकारी पहल की हैं। मिशन मौसम, रडार नेटवर्क का विस्तार, अवलोकन प्रणालियों को मजबूत करना, डेटा संचार अवसंरचना का आधुनिकीकरण और उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग सुविधाओं का संवर्धन सामूहिक रूप से एक अधिक मजबूत और प्रौद्योगिकी-आधारित पूर्वानुमान प्रणाली की दिशा में योगदान दे रहे हैं।

इस कार्यक्रम में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन, आईआईटीएम पुणे के निदेशक डॉ. सूर्यचंद्र राव, आईएमडी, आईआईटीएम और एनसीएमआरडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ वैज्ञानिक मौजूद रहे।