September 8, 2026

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नई दिल्ली, 08 सितंबर । दांतों के इलाज में इस्तेमाल होने वाले इम्प्लांट को और बेहतर बनाने की दिशा में भारतीय वैज्ञानिकों ने महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। वैज्ञानिकों ने ऐसा सिंगल पीस डेंटल इम्प्लांट विकसित किया है, जिसमें दो अलग-अलग मजबूत सामग्रियों को एक साथ जोड़ा गया है। इससे मरीज को बार-बार सर्जरी कराने की जरूरत कम हो सकती है। यह तकनीक इंटरनेशनल एडवांस्ड रिसर्च सेंटर फॉर पाउडर मेटलर्जी एंड न्यू मैटेरियल्स(एआरसीआई) के वैज्ञानिकों ने विकसित की है। एआरसीआई विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के अधीन एक स्वायत्त संस्थान है।

एआरसीआई के वैज्ञानिकों द्वारा जारी रिपोर्ट बताया गया कि आमतौर पर दांत का इम्प्लांट तीन हिस्सों से मिलकर बना होता है। इसमें एक हिस्सा जबड़े की हड्डी में लगाया जाता है, दूसरा हिस्सा उसे दांत के क्राउन से जोड़ता है और तीसरा हिस्सा कृत्रिम दांत यानी क्राउन होता है। इन हिस्सों के बीच हल्की हलचल होने से इम्प्लांट के ढीला होने की समस्या हो सकती है।

इसके अलावा, पारंपरिक इम्प्लांट लगाने के लिए कई मामलों में दो से तीन बार सर्जरी करनी पड़ती है। इससे मरीज को दर्द और असुविधा के साथ उपचार में अधिक समय भी लग सकता है।

इन सभी समस्याओं को दूर करने के लिए वैज्ञानिकों ने टाइटेनियम मिश्रधातु और यिट्रिया-स्टेबिलाइज्ड जिरकोनिया को मिलाकर एक नई द्वि-परतीय संरचना तैयार की है। दोनों सामग्रियां मजबूत और शरीर के लिए अनुकूल मानी जाती हैं।

वैज्ञानिकों के अनुसार, नई तकनीक से इम्प्लांट की मजबूती और स्थिरता बढ़ सकती है तथा जबड़े की हड्डी के साथ उसका जुड़ाव बेहतर हो सकता है। साथ ही, इससे पारंपरिक इम्प्लांट की कुछ कमियों को दूर करने में मदद मिलेगी।