मुंबई, 03 मई। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के अध्यक्ष शरद पवार इस्तीफा देने के अपने फैसले पर...
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मुंबई, 02 मई। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) में शरद पवार के बाद नए अध्यक्ष को लेकर विधानसभा...
मुंबई 02 मई । राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के अध्यक्ष शरद पवार ने कहा कि वे अब...
मुंबई, 02 मई । राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पौत्र अरुण गांधी (89 वर्ष) का मंगलवार सुबह कोल्हापुर...
श्रीनगर, 02 मई । राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एएनआई) ने आज (मंगलवार) सुबह आतंकवाद से जुड़े मामले में...
कोलकाता, 02 मई । पश्चिम बंगाल में एक और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता की हत्या कर...
अहमदाबाद, 1 मई । गुजरात के लोगों पर आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर बिहार के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी...
भारत में कई ऐसे धार्मिक स्थल हैं, जिनसे कई अद्भुत और चमत्कारी रहस्य जुड़े हुए हैं, वहीं ऐसा ही एक चमत्कारी मंदिर असम में स्थित मां कामाख्या देवी का मंदिर है, जो कि अपने रहस्यों के लिए काफी प्रसिद्ध है। यह मंदिर असम की राजाधानी दिसपुर के पास गुवाहाटी से करीब 8 किलोमीटर दूर नीलांचल पर्वत पर स्थित है। कामाख्या देवी मंदिर माता के सभी महत्वपूर्ण शक्तिपीठों में से एक है, जो कि तंत्र विद्या और सिद्धि का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। इस चमत्कारी मंदिर में माता दुर्गा के महामाया रुप की पूजा-आराधना की जाती है। असम के इस प्रसिद्ध मंदिर में माता कामाख्या देवी के अलावा माता काली के अन्य 10 रुप जैसे कमला, बगलामुखी, तारा, धूमवती, भैरवी, चिनमासा, त्रिपुरा, मतंगी, बगोली, सुंदरी आदि दैवियों की मूर्तियां स्थापित हैं। तांत्रिक विद्या के लिए प्रसिद्ध हिन्दुओं के इस रहस्मयी मंदिर में माता कामख्या देवी के रजस्वला (मासिक धर्म) को लेकर कई कथाएं भी प्रचलित हैं, इसके साथ ही माता के इस प्रसिद्ध शक्तिपीठ से कई धार्मिक एवं पौराणिक कहानियां भी जुड़ी हुई हैं। 1 कामाख्या माता मंदिर का इतिहास एवं इससे जुड़ी प्रचलित कथाएं शक्ति साधना और तांत्रिक विद्या के लिए प्रसिद्ध असम में स्थित मां कामाख्या देवी के मंदिर का इतिहास 16वीं शताब्दी से जुड़ा हुआ है। ऐसा माना जाता है कि, 16वीं सदी में कामरुप प्रदेश के राज्यों में हुए युद्ध में राजा विश्वसिंह जीत गए, लेकिन इस दौरान सम्राट विश्वसिंह जी के भाई गायब हो गए थे, जिनकी खोज में वे घूमते-घूमते नीलांचल शिखर पर पहंच गए। इस पर्वत पर राजा विश्वसिंह को एक बुजुर्ग महिला मिली, जिसने राजा को इस जगह का महत्व एवं कामख्या पीठ होने के बारे में बताया। जिसके बाद राजा ने इस जगह की खुदाई करवाना शुरु कर दी, जिसके बाद मूल मंदिर का निचला हिस्सा बाहर निकला और फिर सम्राट विश्वसिंह ने इसी स्थान पर एक नए मंदिर का निर्माण करवाया। वहीं माता के सबसे प्रमुख शक्तिपीठों में से एक कामख्या देवी मंदिर के बारे में यह भी कहा जाता है कि इस मंदिर को 1564 ईसवी में कुछ हमलावरों ने नष्ट कर दिया था, जिसके बाद राजा विश्वसिंह के बेटे नरनारायण फिर से इस मंदिर का पुर्ननिमाण करवाया था। 2 सती और भगवान शिव से जुड़ी है कामख्या देवी मंदिर की पौराणिक कथा कामख्या माता मंदिर से जुड़ी एक प्रचलित एवं मशहूर कथा के मुताबिक राजा दक्ष की पुत्री सती ने भगवान शिव से विवाह किया था, लेकिन राजा दक्ष इस विवाह से खुश नहीं थे। वहीं एक बार राजा दक्ष ने एक यज्ञ का आयोजन किया, जिसमें उन्होंने अपने पुत्री के पति भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया, सती इस बात से काफी क्रोधित हो गई और फिर वे बिना बुलाए ही अपने पिता के घर पहुंच गई। जिसके बाद राजा दक्ष ने उनका और उनके पति का काफी तिरस्कार किया, अपने पिता द्धारा अपने पति का अपमान सती से नहीं सहा गया और फिर उन्होंने हवन कुंड में कूदकर आत्मदाह कर लिया।...
मुंबई, 01 मई । महाराष्ट्र में 236 बाजार उत्पन्न समिति के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)...
देश-दुनिया के इतिहास में 01 मई की तारीख तमाम अहम वजह से दर्ज है। इस तारीख को...
