सरकार ने कहा है कि 2024-25 के एक सर्वेक्षण के अनुसार देश में अब कहीं भी हाथ से मैला ढोने का काम नहीं हो रहा है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार ने कल राज्यसभा में बताया कि 2013 के राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण में 58 हजार और 2018 के सर्वेक्षण में 98 ऐसे लोगों की पहचान की गई थी जो हाथ से मैला ढोते थे।
डॉ. वीरेन्द्र ने बताया कि इन सभी को 40-40 हज़ार रुपये की सहायता पुनर्वास के लिए दी गई। उन्होने कहा कि सरकार ‘नमस्ते’ स्कीम के तहत ऐसे लोगों को टिकाऊ आजीविका के अवसर देना जारी रखे हुए है। डॉ. वीरेन्द्र ने यह जानकारी भी दी कि 2023-24 से 2025-26 तक हाथ से मैला ढोने वाले 5632 लोगों को कौशल प्रशिक्षण दिया गया है और 483 लाभार्थियों को रोजगार के वैकल्पिक अवसर तलाशने के लिए पूंजीगत सब्सिडी दी गई है।
