September 10, 2026

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फिलीपींस अपनी अंतरिक्ष क्षमताओं को मजबूत करने के लिए भारत के साथ साझेदारी बढ़ाने पर विचार कर रहा है। दक्षिण-पूर्व एशियाई देश में सैटेलाइट तकनीक, लॉन्च सिस्टम और अंतरिक्ष बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ रहा है। ऐसे में भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम और तेजी से विकसित हो रहा निजी स्पेस सेक्टर फिलीपींस के लिए अहम मददगार साबित हो सकता है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, फिलीपीन स्पेस एजेंसी (PhilSA) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के साथ सहयोग बढ़ाकर कम लागत वाली इंजीनियरिंग विशेषज्ञता, सैटेलाइट निर्माण क्षमता और विकासशील देशों की साझा प्राथमिकताओं का लाभ उठा सकती है।

फिलीपींस अपने राष्ट्रीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का विस्तार कर रहा है। इसका फोकस कृषि, आपदा प्रबंधन, जलवायु निगरानी और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में अंतरिक्ष तकनीक के इस्तेमाल पर है।

कृषि और आपदा प्रबंधन के लिए सैटेलाइट

PhilSA Multispectral Unit for Land Assessment विकसित कर रही है। यह करीब 130 किलोग्राम का सैटेलाइट है, जिसका इस्तेमाल सटीक कृषि, तटीय सुरक्षा और आपदा जोखिम प्रबंधन में किया जाएगा।

एजेंसी स्थानीय सरकारों और सिविल सोसाइटी संगठनों के बीच सैटेलाइट से मिलने वाले डेटा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए भी कई कार्यक्रम चला रही है।

फिलीपींस के अंतरिक्ष कार्यक्रम को हाल ही में उस समय बढ़ावा मिला, जब राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने कागायान प्रांत में एक स्पेसपोर्ट स्थापित करने की योजना की घोषणा की। उन्होंने घरेलू अंतरिक्ष क्षमताओं को आर्थिक विकास, सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।

क्षमता निर्माण के तहत PhilSA दक्षिण कोरियाई एयरोस्पेस कंपनी Perigee Aerospace के साथ भी काम कर रही है। इसके तहत घरेलू पेलोड ले जाने वाले साउंडिंग रॉकेट मिशन की योजना है।

भारत का बढ़ता निजी स्पेस सेक्टर भी बना आकर्षण

रिपोर्ट के अनुसार, भारत Space Vision 2047 के तहत लंबी अवधि की महत्वाकांक्षी योजनाओं पर काम कर रहा है। इसमें गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन के साथ भविष्य में चंद्रमा और शुक्र से जुड़े मिशन भी शामिल हैं।

भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र भी तेजी से पहचान बना रहा है। रिपोर्ट में हैदराबाद स्थित Skyroot Aerospace का उल्लेख किया गया है, जो Vikram सीरीज के लॉन्च व्हीकल विकसित कर रही है और भारत का पहला निजी तौर पर विकसित रॉकेट लॉन्च कर चुकी है।

रिपोर्ट के मुताबिक, Skyroot जैसी कंपनियों का उभरना दिखाता है कि भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम केवल सरकारी प्रयासों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि एक व्यापक व्यावसायिक स्पेस इकोसिस्टम के रूप में विकसित हो रहा है। इससे भारत उन देशों के लिए संभावित साझेदार बन रहा है, जो अपनी स्वतंत्र अंतरिक्ष क्षमताएं विकसित करना चाहते हैं।