नई दिल्ली, 11 सितंबर । दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को राज्या महिला आयोग की बैठक में में कहा कि आयोग को महिलाओं से जुड़ी ऑनलाइन शिकायत व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ महिलाओं और बालिकाओं के हितों से जुड़े मुद्दों पर जमीनी स्तर पर सक्रियता बढ़ानी चाहिए। उन्होंने पॉस्को और साइबर अपराधों के प्रति बालिकाओं को जागरूक करने, पात्र किशोरियों तक एचपीवी टीकाकरण का लाभ पहुंचाने और महिलाओं की शिकायतों के ऑनलाइन निस्तारण की व्यवस्था को और सरल एवं प्रभावी बनाने पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री जनसेवा सदन में आयोजित इस बैठक में आयोग की अध्यक्ष लता गुप्ता, सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि कॉलेजों में पढ़ने वाली छात्राओं को साइबर अपराधों से बचाव के लिए विशेष रूप से जागरूक किया जाना चाहिए। उन्होंने आयोग को कॉलेजों में अभियान चलाकर छात्राओं को ऑनलाइन उत्पीड़न, सोशल मीडिया के दुरुपयोग, साइबर ठगी और अन्य डिजिटल अपराधों से बचने के उपायों की जानकारी देने तथा किसी घटना की स्थिति में शिकायत कहां और किस प्रकार दर्ज कराई जाए, इसकी जानकारी उपलब्ध कराने की सलाह दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बालिकाओं को उनके अधिकारों और यौन अपराधों से सुरक्षा के लिए उपलब्ध कानूनी प्रावधानों की जानकारी होना बेहद जरूरी है। उन्होंने आयोग से पॉस्को अधिनियम के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए स्कूलों और कॉलेजों में अभियान चलाने तथा बालिकाओं को शोषण या उत्पीड़न की स्थिति में उपलब्ध सहायता और शिकायत व्यवस्था के बारे में जानकारी देने को कहा। उन्होंने सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए एचपीवी टीकाकरण को लेकर भी जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज के वंचित और जरूरतमंद वर्गों की पात्र किशोरियों तक निःशुल्क एचपीवी टीकाकरण की जानकारी और सुविधा पहुंचाना प्राथमिकता होनी चाहिए। आयोग को इस दिशा में जागरूकता गतिविधियां बढ़ाने और जरूरतमंद परिवारों तक सही जानकारी पहुंचाने के लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय करने की सलाह दी।
मुख्यमंत्री ने महिला आयोग की ऑनलाइन शिकायत व्यवस्था को और मजबूत करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि घरेलू हिंसा, मानव तस्करी, यौन शोषण और उत्पीड़न जैसी शिकायतों के लिए महिलाओं को सरल, सुलभ और भरोसेमंद व्यवस्था मिलनी चाहिए। ऑनलाइन शिकायत प्रणाली ऐसी होनी चाहिए, जिसमें महिला आसानी से अपनी शिकायत दर्ज करा सके और उसके निस्तारण की प्रक्रिया की जानकारी भी उसे मिलती रहे। उन्होंने आयोग की कार्यप्रणाली को महिलाओं की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप और अधिक प्रभावी बनाने तथा शिकायतों के निस्तारण में संवेदनशीलता और तत्परता सुनिश्चित करने की सलाह दी।
मुख्यमंत्री ने महिलाओं को संकट की स्थिति में सहायता उपलब्ध कराने वाले वन स्टॉप सेंटरों (सखी) तथा सरकार और गैर-सरकारी संस्थाओं द्वारा संचालित महिला आश्रय एवं देखभाल संस्थानों का दौरा कर वहां की व्यवस्थाओं की समीक्षा करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों में रहने वाली महिलाओं को सुरक्षित वातावरण के साथ आवश्यक चिकित्सा, परामर्श, कानूनी सहायता और पुनर्वास संबंधी सुविधाएं प्रभावी ढंग से मिलनी चाहिए। महिलाओं की समस्याओं का समाधान केवल शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई तक सीमित नहीं होना चाहिए बल्कि जागरूकता, रोकथाम, सहायता और शिकायत-निवारण, हर स्तर पर आयोग की सक्रिय भूमिका दिखाई देनी चाहिए।
