केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच 8वें वेतन आयोग को लेकर काफी उत्सुकता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि 7वें वेतन आयोग की तुलना में 8वें वेतन आयोग के लागू होने पर सैलरी और पेंशन में कितनी बढ़ोतरी होगी। हालांकि, वास्तविक बढ़ोतरी का पता आयोग की अंतिम सिफारिशों और सरकार की मंजूरी के बाद ही चलेगा। फिलहाल फिटमेंट फैक्टर के अलग-अलग अनुमानों के आधार पर संभावित वेतन वृद्धि का आकलन किया जा रहा है।
7वें वेतन आयोग में केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये प्रति माह निर्धारित की गई थी। वहीं, न्यूनतम बेसिक पेंशन 9,000 रुपये प्रति माह है। 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर की भूमिका अहम होगी। इसी फैक्टर के आधार पर मौजूदा बेसिक वेतन और पेंशन को संशोधित करने का हिसाब लगाया जा सकता है। हालांकि, अभी किसी अनुमानित फिटमेंट फैक्टर को अंतिम निर्णय मानना सही नहीं होगा।
उदाहरण के तौर पर, यदि फिटमेंट फैक्टर 2.0 रखा जाता है, तो 18,000 रुपये की न्यूनतम बेसिक सैलरी बढ़कर 36,000 रुपये हो सकती है। यदि फैक्टर 2.5 होता है, तो यह राशि 45,000 रुपये तक पहुंच सकती है। इसी तरह, 2.0 के फैक्टर पर 9,000 रुपये की न्यूनतम बेसिक पेंशन 18,000 रुपये और 2.5 के फैक्टर पर 22,500 रुपये हो सकती है। ये केवल गणितीय उदाहरण हैं, आयोग की आधिकारिक सिफारिशें नहीं।
ध्यान देने वाली बात यह है कि बेसिक सैलरी में होने वाली बढ़ोतरी और हाथ में मिलने वाली कुल सैलरी अलग-अलग होती हैं। महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), यात्रा भत्ता और अन्य कटौतियां अंतिम वेतन को प्रभावित करती हैं। नया वेतन ढांचा लागू होने पर महंगाई भत्ते के समायोजन और अन्य भत्तों के नियमों के कारण वास्तविक लाभ अनुमान से अलग हो सकता है।
