जगदलपुर, 21 अक्टूबर । रियासत कालीन बस्तर दशहरा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा, सामाजिक समरसता और जनभागीदारी का अद्भुत संगम है। लगभग 75 दिनों तक चलने वाले इस ऐतिहासिक पर्व में जहां विभिन्न रस्मों और परंपराओं का निर्वहन किया जाता है, वहीं इससे जुड़े सेवाभावी लोगों का योगदान भी विशेष महत्व रखता है।
इसी कड़ी में कुमार जयदेव द्वारा दशहरा पर्व के दौरान सेवादारों, रथ निर्माण में जुटे कारीगरों, मांझी-चालकी, सिरहा-गुनिया और पुजारी गणों के लिए भोजन, जलपान एवं ठहरने की व्यवस्था कराई जा रही है। उनके इस निस्वार्थ सेवा भाव की बस्तर दशहरा समिति के उपाध्यक्ष बलराम मांझी ने आज बुधवार काे सराहना करते हुए उन्हें साधुवाद दिया है। बलराम मांझी ने कहा कि धन-संपत्ति तो बहुत लोगों के पास होती है, लेकिन उसे दूसरों की सेवा में लगाने एवं नि:स्वार्थ भाव हर किसी में नहीं होता। वे दशहरा ही नहीं, बल्कि अन्य धार्मिक आयोजनों और पूजा-पाठ के कार्यों में भी हमेशा समाज के लोगों के साथ खड़े रहते हैं और हर संभव सहयोग प्रदान करते हैं।
बलराम मांझी ने कहा कि जयदेव बाबा द्वारा दशहरा पर्व के दौरान जिस समर्पण और सेवाभाव के साथ लोगों की सेवा की जा रही है, वह अपने आप में प्रशंसनीय है। दशहरा की विभिन्न रस्मों को संपन्न कराने के लिए दूर-दूर से सेवादार, रथ निर्माण के कारीगर, मांझी-चालकी, सिरहा-गुनिया और पुजारी गण पहुंचते हैं। पर्व की तैयारियों से लेकर अंतिम विदाई तक इन सभी की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। ऐसे में उनके भोजन, जलपान और ठहरने की व्यवस्था के लिए आगे आना वास्तव में अनुकरणीय कार्य है।
उन्होंने बताया कि दशहरा पर्व के दौरान अंसख्य देवी-देवताओं के साथ उनके सेवादार भी पहुंचते हैं। शासन की ओर से उनके लिए राशन और ठहरने की व्यवस्था की जाती है, लेकिन किन्हीं कारणों से जिन लोगों तक यह सुविधाएं नहीं पहुंच पातीं, उनकी आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर कुमार जयदेव बाबा अपनी ओर से व्यवस्था कर रहे हैं। यह उनकी संवेदनशीलता और सेवा के प्रति समर्पण को दर्शाता है। उन्हाेने कहा कि कुमार जयदेव का सेवा कार्य सभी के लिए प्रेरणादायक है। बलराम मांझी ने उनके प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि दशहरा पर्व की शुरुआत से लेकर अंतिम विदाई तक उनके द्वारा जिस तरह सेवा की जा रही है, उसके लिए वे उन्हें हृदय से साधुवाद देते हैं।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का मुरिया दरबार में आगमन पूरे बस्तर के लिए अत्यंत गर्व का विषय है। यह अवसर बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय परंपराओं और ऐतिहासिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण अवसर होगा। मुरिया दरबार का अपना विशिष्ट इतिहास और परंपरा है, जिसके साक्षी बनने के लिए राष्ट्रपति का आगमन बस्तरवासियों के लिए गौरवपूर्ण क्षण है। राष्ट्रपति के आगमन से बस्तर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपराओं को व्यापक पहचान मिलेगी।
इस अवसर पर बलराम मांझी के साथ अन्य दो परगनाओं के मांझी भी उपस्थित रहे। उन्होंने भी कुमार कुमार जयदेव के सेवा कार्यों की सराहना करते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि ऐसे सेवाभावी प्रयास बस्तर दशहरा की परंपराओं को और अधिक सशक्त बनाने के साथ समाज में सहयोग, समर्पण और सद्भाव की भावना को मजबूत करते हैं।
