भारतीय नौसेना का प्रथम प्रशिक्षण दस्ता दो युद्धपोतों और तटरक्षक बल के एक पोत के साथ सोमवार को तीन दिवसीय सद्भावना यात्रा पर श्रीलंका पहुंचा। भारतीय उच्चायोग ने यह जानकारी देते हुए बताया कि इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग को बढ़ावा देना है। यह यात्रा लंबी दूरी के प्रशिक्षण अभियान का हिस्सा है। इसके तहत श्रीलंका के बाद सेशेल्स के पोर्ट विक्टोरिया और मालदीव की राजधानी माले भी जाएंगे। इसके बाद यह कोच्चि स्थित अपने आधार बंदरगाह पर लौटेगा।
यह प्रशिक्षण दस्ता भारतीय नौसेना, भारतीय तटरक्षक बल और मित्र देशों की नौसेनाओं के प्रशिक्षु अधिकारियों को समुद्र में प्रारंभिक प्रशिक्षण प्रदान करता है।
इस दस्ते की कमान प्रथम प्रशिक्षण दस्ते के वरिष्ठ अधिकारी और आईएनएस तीर के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन तिजो के. जोसेफ के हाथों में है।
भारतीय मिशन ने बताया कि श्रीलंका नौसेना के पांच प्रशिक्षु अधिकारी भी इस लंबी दूरी के प्रशिक्षण अभियान में हिस्सा ले रहे हैं। श्रीलंका नौसेना के प्रशिक्षण महानिदेशक रियर एडमिरल रोहन जोसेफ के कोलंबो बंदरगाह पहुंचने पर इन पोतों का दौरा करने और उन पर तैनात कमांडिंग अधिकारियों, प्रशिक्षण अधिकारियों तथा प्रशिक्षुओं से बातचीत करने की योजना है।
प्रथम प्रशिक्षण दस्ते के वरिष्ठ अधिकारी और यात्रा पर आए जलपोतों के कमांडिंग अधिकारी श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त संतोष झा तथा श्रीलंका नौसेना के पश्चिमी नौसैनिक क्षेत्र के कमांडर रियर एडमिरल हर्षा डी सिल्वा से भी मुलाकात करेंगे। यात्रा के दौरान प्रशिक्षु अधिकारी श्रीलंका नौसेना के साथ पेशेवर, प्रशिक्षण संबंधी और खेल गतिविधियों में हिस्सा लेंगे।
इसके अलावा, भारतीय प्रशिक्षु अधिकारियों के त्रिंकोमाली स्थित नौसेना एवं समुद्री अकादमी (एनएमए) का दौरा करने और श्रीलंका के नौसैनिक प्रशिक्षुओं के भारतीय पोतों का दौरा करने की भी योजना है। त्रिंकोमाली द्वीपीय देश श्रीलंका के उत्तर-पूर्वी तट पर स्थित एक बंदरगाह शहर है।
प्रथम प्रशिक्षण दस्ते के तहत आईएनएस तरंगिणी इस साल मार्च में भी श्रीलंका गया था। उस दौरान उसने त्रिंकोमाली स्थित नौसेना एवं समुद्री अकादमी के श्रीलंकाई प्रशिक्षु अधिकारियों को समुद्र में नौकायन का प्रशिक्षण और व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया था।
भारतीय उच्चायोग ने कहा कि भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल के पोतों की श्रीलंका यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के समुद्री सुरक्षा बलों के बीच संबंधों को और मजबूत करना है। यह भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति और ‘क्षेत्रों में सुरक्षा एवं विकास के लिए पारस्परिक तथा समग्र उन्नति’ (महासागर) की परिकल्पना के अनुरूप है।
