देहरादून, 24 अप्रैल । उत्तराखंड के चार धामों के प्रति जहां देश-दुनिया के लाखों-करोड़ों की आस्था और श्रद्धा है तो वहीं प्रतिवर्ष इन धामों के दर्शन को लाखों लाख लोग आते हैं। पूरे देश में इनकी करोड़ों की संपत्तियां फैली हुई हैं। दान-दाताओं की दान की गईं इन संपत्तियों पर बहुत से लोगों कब्जा कर रखा है। अब बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति अपनी संपत्तियों से ऐसे कब्जों को हटाने का निर्णय लिया है।
बद्रीनाथ-केदारनाथ समिति के अध्यक्ष अजेन्द्र अजय ने कहा कि अब भगवान बद्रीनाथ-केदारनाथ को दी गई करोड़ों के दान की संपत्तियों का ब्योरा लेना प्रारंभ कर दिया गया है। इन संपत्तियों पर वर्षों से लोगों का कब्जा है। मंदिरों, धर्मशालाओं और दुकानों को जिन किरायेदारों ने किराये पर लिया था, उन्होंने इतने वर्षों में न तो किराया बढ़ाया है और न ही समिति को उनकी संपत्ति वापस कर रहे हैं। अब तक के अध्यक्षों ने इस मामले पर बहुत ध्यान नहीं दिया था, लेकिन वे इस मामले में काफी सजग हैं। इन संपत्तियों पर लोगों ने कब्जा तो जमा ही रखा है। साथ ही कुछ लोग ऐसे भी हैं जो नाममात्र का किराया मंदिरों को भेजते हैं जबकि तमाम लोग ऐसे हैं जो अपने भाव और प्रभाव के आधार पर मंदिर की संपत्तियों पर पूरी तरह से स्वामी जैसे काबिज हैं। वे मंदिर समिति को कुछ भी नहीं दे रहे हैं।
कई राज्यों में हैं बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति की संपत्तियां-
मंदिर समिति की जानकारी के अनुसार ऐसी संपत्तियां हरिद्वार, हल्द्वानी, रामनगर, महाराष्ट्र के मुरादनगर, लखनऊ, देहरादून आदि शहरों में हैं, जो इस समय बेशकीमती हैं। ऐसे महत्वपूर्ण स्थानों पर जिनका व्यवसायिक उपयोग हो रहा है। इन जमीनों और संपत्तियों को यदि मंदिर समिति को दे दिया जाए तो इन्हीं से मंदिर समिति को करोड़ों की आय होगी जबकि इन संपत्तियों पर मंदिर समिति को कहीं से केवल नाममात्र का ही किरायामिल रहा है तो कहीं से कुछ नहीं मिल रहा है।
महाराष्ट्र के मुरादनगर में 17 एकड़ जमीन है। इस पर एक परिवार का कब्जा है। लखनऊ में 11 हजार वर्ग फुट की संपत्ति है, जिस पर भी कब्जा है। राजपुर रोड पर बद्री-केदार मंदिर की जो संपत्ति है, वह करोड़ों की है। पहले प्रत्येक शहर में संपत्ति की देखरेख के लिए मंदिर समिति की ओर से एक प्रतिनिधि नियुक्त किया जाता था, लेकिन पिछले काफी समय से यह व्यवस्था ध्वस्त हो गई है। इसके कारण संपत्तियों पर अवैध कब्जे तो हैं ही, मंदिर को आय भी नहीं हो रही है। दूसरी ओर मंदिर संपत्ति पर काबिज लोग इनका व्यवसायिक उपयोग कर रहे हैं और पूरा लाभ स्वयं ले रहे हैं। इसके कारण स्थिति काफी गंभीर हो गई है।
इस संबंध में मंदिर समिति के अध्यक्ष अजेन्द्र अजय से जब बातचीत की गई, जिन्हें अध्यक्ष पद नामित किया गया है। उनका कहना है कि वे मंदिर समिति को सुधारने का काम कर रहे हैं।
वित्तीय अनियमितता के आरोप में निलंबित हो चुके हैं व्यवस्थापक-
अध्यक्ष अजेन्द्र अजय ने बताया कि व्यवस्था सुधारने के क्रम में ही उन्होंने श्रीबदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के व्यवस्थापक राकेश सेमवाल को वित्तीय अनियमितता और अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित किया है। मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी योगेंद्र सिंह की ओर से इस बारे में आदेश जारी किए गए थे। इस आदेश में कहा गया था कि सेमवाल ने गंगोत्री, यमुनोत्री में प्रभारी अधिकारी रहने के दौरान वित्तीय अनियमितता की है।
उन्होंने समिति के उपाध्यक्ष किशोर सिंह पंवार की अध्यक्षता में जांच के लिए एक संयुक्त जांच समिति गठित की थी। समिति में मंदिर समिति के सदस्य भाष्कर डिमरी, जिला महाप्रबंधक उद्योग उत्तरकाशी शैली डबराल, कोषाधिकारी ऋषिकेश और एनआईसी के तीन तकनीकी विशेषज्ञ शामिल थे। मंदिर समिति के अध्यक्ष ने बताया कि समिति की जांच में वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया।
समिति अध्यक्ष ने कई अन्य मामलों पर भी अपनाया है कठोर रुख-
इसी प्रकार मंदिर समिति के अध्यक्ष ने कई अन्य मामलों पर भी कठोर रुख अपनाया है। अजेन्द्र अजय ने बताया कि दानदाताओं ने श्री बद्री-केदार मंदिर समिति को दान के रूप में अरबों की संपत्ति दान की है। इस संदर्भ में 188 अवैध कब्जाधारकों को नोटिस दिया गया है और उनके कब्जे हटाने के लिए विधिक कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष इस संबंध में लोगों से 22 लाख रुपये का राजस्व वसूला गया और अब मंदिर समिति की संपत्तियों पर अवैध कब्जों को हटाने का मन बनाया गया है। इस संदर्भ में विधि विशेषज्ञों से परामर्श किया जा रहा है। मंदिर की आय व्यय पर अंकुश रहे इसके लिए वित्त अधिकारी की नियुक्ति का प्रबंध किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि करोड़ों करोड़ जनता की श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ में अपार श्रद्धा है। उनके दान दी गई संपत्तियों पर अवैध कब्जा न हो और मंदिर समिति को वांछित आय होती रहे, इसके लिए गंभीर प्रयास किया जा रहा है।
