नई दिल्ली, 23 जून । न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने न्यायिक हिरासत में कैदियों द्वारा जानबूझकर खुद को नुकसान पहुंचाने और आत्महत्या के प्रयासों को कम करने के लिए केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन को एक परामर्शी जारी की है। एनएचआरसी ने पाया है कि अधिकांश कैदियों की अप्राकृतिक मौतें आत्महत्या के कारण होती हैं।
इन आत्महत्याओं को रोकने के लिए उनपर ध्यान देने के अलावा एनएचआरसी ने इस बात पर जोर दिया है कि बैरकों के साथ-साथ शौचालयों को, जहां सबसे अधिक आत्महत्याएं होती हैं, उन वस्तुओं से मुक्त रखा जाना चाहिए। जिनका उपयोग फंदा लगाने के लिए किया जा सकता है। जैसे, लोहे की छड़ें/ग्रिल्स, पंखे, हुक या इसी तरह की अन्य वस्तुएं। कैदी से उसके परिवार के सदस्यों की मुलाकात और उनके साथ टेलीफोनिक संचार के माध्यम से संपर्क को प्रोत्साहित करना एक और महत्वपूर्ण सिफारिश है।
एनएचआरसी के महासचिव देवेन्द्र कुमार सिंह ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासकों को एक पत्र लिखा है, जिसकी एक प्रति गृह मंत्रालय, पुलिस अनुसंधान और विकास ब्यूरो तथा सभी महानिदेशक, कारागार को भी भेजकर तीन महीने के भीतर एनएचआरसी द्वारा जारी परामर्शी में की गई सिफारिशों के कार्यान्वयन और उस पर की गई कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है।
परामर्शी में केंद्र, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश प्रशासनों द्वारा कार्रवाई के लिए 11 प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा गया है। इनमें रिक्त पदों को भरना और कर्मचारियों की संख्या बढ़ाना, जेल कर्मचारियों और कैदियों को प्रशिक्षण देना, जेल में कैदियों के प्रवेश के समय उनके मानसिक स्वास्थ्य की जांच करना, जोखिम वाले कैदियों का पर्यवेक्षण और निगरानी करना, शमन के लिए एक सहयोगी ढांचा बनाना, कैदियों के बीच नशे की समस्या का मुद्दा, प्रासंगिक वैधानिक प्रावधान का अनुपालन, जेल हाउसकीपिंग, आगंतुक प्रणाली को सुदृढ़ करना और जेल वास्तुकला और उसके वातावरण में सुधार करना शामिल हैं।
