धमतरी,अंतर्राष्ट्रीय बाजार में डीएपी की कीमत तेजी से बढ़ने और भारत में इसकी आपूर्ति काफी हद तक अन्य देशों के आयात पर निर्भर होने की वजह से डीएपी की कमी बनी हुई है। इस समस्या के समाधान के लिए इंदिरा गांधी कृषि विश्व विद्यालय रायपुर द्वारा खरीफ और रबी वर्ष 2022-23 में वैकल्पिक उर्वरकों का उपयोग कर डीएपी की कमी को दूर करने किसानों को नसीहत दी गई है।
उप संचालक कृषि मोनेश कुमार साहू ने बताया कि फसलवार उर्वरक अनुशंसा के आधार पर विकल्प हो सकते हैं। इनमें धान और मक्का फसल के लिए अनुशंसित पोषक तत्व एनपीके 40:24:16 (नाईट्रोजन 40, फास्फोरस 24, पोटाश 16) किग्रा प्रति एकड़ मात्रा आपूर्ति के लिए यूरिया एक बोरी (50 किग्रा.), एनपीके (20:20:13) दो बोरी (100 कि ग्रा) और पोटाश (27 किग्रा.) अथवा यूरिया (65 कि ग्रा), एनपीके (12:32:16) दो बोरी (100 किग्रा.), सिंगल सुपर फास्फेट (50 किग्रा.) अथवा यूरिया दो बोरी (100 कि.ग्रा.), सिंगल सुपर फास्फेट तीन बोरी (150 कि.ग्रा.), पोटाश 27 कि ग्रा. का उपयोग किया जा सकता है। साथ ही वर्मी कम्पोस्ट कम से कम एक क्विंटल प्रति एकड़ की दर से उपयोग में लाया जा सकता है।
खरीफ दलहनी फसल के लिए खाद का करें उपयोग
खरीफ दलहनी फसलों के लिए अनुशंसित पोषक तत्व एनपीके (नाइट्रोजन 8, फास्फोरस 20, पोटाश 8) कि ग्रा. प्रति एकड़ मात्रा की आपूर्ति के लिए यूरिया 18 किग्रा., पोटाश 14 कि.ग्रा, सिंगल सुपर फास्फेट ढाई बोरी (125 कि. ग्रा.) अथवा यूरिया पांच किग्रा., एनपीके (12:32:16) एक बोरी (50 कि.ग्रा.), पोटाश 14 किग्रा. सिंगल सुपर फास्फेट 25 किग्रा. के साथ ही वर्मी कंपोस्ट कम से कम एक क्विंटल प्रति एकड़ की दर से उपयोग किया जा सकता है। खरीफ तिलहनी फसलों के लिए अनुशंसित पोषक तत्व एनपीके (नाइट्रोजन 8, फास्फोरस 20, पोटाश आठ किग्रा (सोयाबीन एवं मूंगफली) प्रति एकड़ आपूर्ति के लिए यूरिया (17 कि.ग्रा.) पोटाश (13 कि.ग्रा.), सिंगल सुपर फास्फेट (125 किग्रा.) के साथ वर्मी कम्पोस्ट कम से कम एक क्विंटल प्रति एकड़ की दर से उपयोग कर सकते हैं। रामतील अनुशंसित पोषक तत्वों की मात्रा (12:12:8) किग्रा. नत्रजन, स्फूर एवं पोटाश प्रति एकड़। इन पोषक तत्व की पूर्ति के लिए यूरिया 26 किग्रा. सिंगल सुपर फास्फेट 25 किग्रा. एवं म्यूरेट ऑफ पोटाश 13 किग्रा. का प्रयोग किया जा सकता है। साथ ही वर्मी कम्पोस्ट एक क्विंटल प्रति एकड़ की दर से उपयोग कर सकते हैं। इसी तरह अन्य फसल के लिए खाद का उपयोग किया जा सकता है।
