बाजार में इन झंडों की खूब मांग है। दुकानदारों का दावा है कि ये झंडे करीब एक से डेढ़ महीने में तेज धूप और पानी में गलकर खुद ही नष्ट हो जाएंगे।
लोकसभा चुनाव में प्रचार करने के लिए राजनीतिक पार्टियां व कार्यकर्ता ईको फ्रेंडली (पर्यावरण अनुकूल) झंडों का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। बाजार में इन झंडों की खूब मांग है। दुकानदारों का दावा है कि ये झंडे करीब एक से डेढ़ महीने में तेज धूप और पानी में गलकर खुद ही नष्ट हो जाएंगे।
प्लास्टिक की तरह इनसे पर्यावरण को नुकसान नहीं होगा। सदर बाजार में दिल्ली-एनसीआर ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा समेत कई अन्य राज्यों से राजनीतिक पार्टियां प्रचार सामग्री की खरीदारी करने आ रही हैं।
बाजार में झंडे, टोपी, बैज और बैनर की भारी मांग है। कारोबारियों को लगातार सियासी दलों से ऑर्डर मिल रहे हैं। सदर बाजार में प्रचार सामग्री के थोक कारोबारी राहुल कुमार ने बताया कि दूसरे व तीसरे चरण के लिए इको फ्रेंडली झंडों व बैनर की मांग सबसे अधिक हुई है। वहीं, सातवें चरण में दिल्ली की सातों लोकसभा सीटों पर भी चुनाव होने है। इस कारण प्रचार में इको फ्रेंडली प्रचार सामग्री की मांग बढ़ी है। उन्होंने बताया कि उम्मीद है कि मांग और ज्यादा बढ़ेगी।
यूपी के व्यापारियों को मिला ज्यादा काम
दरअसल, सदर बाजार के व्यापारियों के मुताबिक ज्यादातर ऑर्डर उत्तर प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र जैसे राज्यों से मिल रहे हैं, जहां लोकसभा की सीटें ज्यादा हैं। इस बार कारोबारी सस्ते और ईको-फ्रेंडली बैनर, बैग और झंडों में ज्यादा अपना रुझान जाहिर कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रचार सामग्री में इस पारंपरिक झंडे, बिल्ले, पटकों के साथ-साथ इस बार राजनीतिक दलों के चुनाव चिह्न वाले पॉकेट डायमंड बिल्ले, कटआउट और चाबी के छल्ले भी बाजार में छाए हुए हैं। बहुत से उम्मीदवार भले ही चुनाव प्रचार के पारंपरिक तरीकों को पसंद करते हैं, लेकिन व्यापारियों को लगता है कि राजनैतिक दलों की तरफ से प्रचार में डिजिटल माध्यम का इस्तेमाल करने से उनके कारोबार पर बुरा असर पड़ रहा है।
