LignoSat, दुनिया का पहला लकड़ी का सैटेलाइट, अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर भेजा गया है, जो धरती से 400 किलोमीटर ऊपर स्थित है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा और जापान की स्पेस एजेंसी जाक्सा (JAXA) ने इसे स्पेस में लॉन्च किया है। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मिशन का उद्देश्य यह समझना है कि लकड़ी का उपयोग किस प्रकार से मंगल और चंद्रमा पर आगामी स्पेस मिशनों के लिए किया जा सकता है। इसी उद्देश्य के तहत LignoSat को अंतरिक्ष में भेजा गया है।
LignoSat का आकार कितना है?
जानकारी के अनुसार, लिग्नोसैट का आकार एक कॉफी मग के बराबर है। इसे बनाने में मैगनोलिया लकड़ी
का इस्तेमाल किया गया है।
LignoSat का आकार एक कॉफी मग के बराबर है और इसे बनाने के लिए मैगनोलिया लकड़ी का इस्तेमाल किया गया है।
मैगनोलिया लकड़ी को क्यों चुना गया?
स्पेस एजेंसियों ने जिस मैगनोलिया लकड़ी से यह सैटेलाइट तैयार किया है, उसे पहले अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर टेस्ट किया गया था। वैज्ञानिकों ने तीन अलग-अलग तरह की लकड़ियों का परीक्षण किया, और सभी ने अंतरिक्ष में बिना किसी नुकसान के काम किया। हालांकि, मैगनोलिया लकड़ी को चुनने का कारण यह था कि सैटेलाइट के निर्माण में इसका टूटने का खतरा बहुत कम था।
स्पेस स्टेशन पर पहुंचने के बाद, LignoSat को छह महीने के लिए ऑर्बिट में तैनात किया जाएगा। इसमें इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगे होंगे, जो यह मापेंगे कि लकड़ी अंतरिक्ष के कठोर वातावरण को किस तरह से सहन करती है।
स्पेस स्टेशन में तापमान हर 45 मिनट में -100 से 100 डिग्री सेल्सियस के बीच बढ़ता-घटता रहता है, क्योंकि यह अंधेरे से सूरज की रोशनी में चक्कर लगाता है। जापान के सुमितोमो फॉरेस्ट्री त्सुकुबा रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रबंधक केंजी करिया के अनुसार, LignoSat यह भी जांचेगा कि लकड़ी अर्धचालकों पर अंतरिक्षीय विकिरण के प्रभाव को कम करने में कितनी प्रभावी है।
LignoSat को अंतरिक्ष में भेजकर वैज्ञानिक यह जानना चाहते हैं कि लकड़ी से बने सैटेलाइट्स कितने प्रभावी हो सकते हैं। पिछले 50 सालों में, दुनिया भर की स्पेस एजेंसियों ने हजारों सैटेलाइट्स अंतरिक्ष में भेजे हैं, जिनका कार्यकाल समाप्त हो चुका है और अब वे कबाड़ या मलबे के रूप में तैर रहे हैं। इससे अन्य सक्रिय सैटेलाइट्स को खतरा हो रहा है। लकड़ी से बने सैटेलाइट्स इन समस्याओं का समाधान पेश कर सकते हैं।
