नई दिल्ली | दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विधानसभा में शुक्रवार को सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रबंधन पर सदन के समक्ष दूसरी सीएजी रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट ने न केवल केजरीवाल सरकार की असलियत को उजागर किया है बल्कि दिल्लीवासियों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को भी बेनकाब कर दिया है।
इस रिपोर्ट में दिल्ली में ‘सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना और स्वास्थ्य सेवाओं का प्रबंधन’ की निष्पादन लेखापरीक्षा के परिणाम समाविष्ट हैं, जो 2016-17 से 2021-22 तक की अवधि से संबंधित हैं। रिपोर्ट में विभिन्न स्वास्थ्य देखभाल संस्थाओं में कर्मचारियों की कमी, रोगी देखभाल में कमियां, जैसे अस्पतालों में औषधियों और उपकरणों की अनुपलब्धता, दवाइयों के वितरण में विलंब, नैदानिक सेवाओं और सर्जरी आदि के लिए अधिक प्रतीक्षा समय, स्वास्थ्य अवसंरचना परियोजनाओं को पूरा करने में विलंब, स्वास्थ्य क्षेत्र के अंतर्गत केंद्र और राज्य प्रायोजित योजनाओं के कार्यान्वयन में कमियां आदि शामिल हैं।
इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने सीएजी रिपोर्ट के सदन में प्रस्तुत होने से पहले लीक होने और उसके कुछ अंशों का मीडिया में प्रकाशित होने पर सख्त आपत्ति जताई है। दिल्ली के कानून मंत्री कपिल मिश्रा ने सीएजी रिपोर्ट लीक करने वाले पर कठोर कार्रवाई की मांग की है। भाजपा विधायकों ने इस मामले की कमेटी बनाकर जांच कराने की मांग की है।
भाजपा विधायक हरीश खुराना ने कहा कि सीएजी की यह रिपोर्ट आम आदमी पार्टी (आआपा) सरकार के स्वास्थ्य क्रांति की पोल खोल रही है। आआपा सरकार के बड़े-बड़े स्वास्थ्य मॉडल के दावों की असली सच्चाई सीएजी रिपोर्ट ने उजागर कर दी है। अस्पतालों को बनाने में देरी की वजह से दिल्ली सरकार के खजाने को काफी नुकसान हुआ है। स्वास्थ्य क्रांति के दस वर्षों में आआपा सरकार अस्पतालों में केवल 1235 बेड ही उपलब्ध कर पाई है। खुराना ने कहा कि कोरोना काल में केंद्र सरकार के स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दिए गए धन का उपयोग भी आआपा सरकार नहीं कर पाई थी।
भाजपा विधायकों ने सीएजी रिपोर्ट पर चर्चा में कहा कि आआपा सरकार की स्वास्थ्य क्रांति केवल विज्ञापनों तक ही रही। उनकी स्वास्थ्य संबंधी योजनाएं विज्ञापनों में शुरू होकर खत्म भी हो गईं। आआपा सरकार ने शिक्षा और स्वास्थ्य में बजट बढ़ाकर बंदरबांट की है। उन्होंने दिल्ली की जनता के पैसे को लूटने का काम किया है। आज भी दिल्ली सरकार के अस्पतालों में डाक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों और दवाइयों की अत्यंत कमी है।
