नई दिल्ली। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने कहा कि आम आदमी पार्टी के 11 वर्षों के कार्यकाल में डीटीसी को 60,750 करोड़ का घाटा परिवहन क्षेत्र को दुरुस्त न करने में सबसे बड़ी नाकामी है। उन्होंने ने सीएजी रिपोर्ट में उजागर डीटीसी के 60,750 करोड़ के घाटे की जांच की मांग की।
उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने पूरा समय डीटीसी की बसों के सुचारू परिचालन के लिए कदम न उठाकर दिल्ली के परिवहन ढांचे को बर्बाद कर दिया। केजरीवाल सरकार ने डीटीसी बसों की संख्या बढ़ाने की जगह पूरा ध्यान सिर्फ विज्ञापनों पर केंद्रित रखा और निजी बसों को बढ़ाने पर महत्व दिया, जिसके कारण डीटीसी विभाग साल दर साल घाटे में डूबता गया।
देवेंद्र यादव ने कहा कि केजरीवाल सरकार ने डीटीसी बसों की संख्या कम होने बावजूद नई बसों की खरीद नहीं की जबकि बसों की संख्या लगातार कम होती रही थी। एनसीआर और पड़ोसी शहरों के रूटों पर बसों का संचालन बंद कर दिया। परिचालन के अलावा डीटीसी के अन्य संसाधनों से विज्ञापन, किराए व अन्य आमदनी के नए अवसर नही तलाश किए, माइलेज कम होने से सीएनजी का खर्च बढ़ा और 122 करोड़ अतिरिक्त खर्च हुआ, जैसी नाकामियों के कारण डीटीसी का घाटा 2021-22 तक 60,750 करोड़ हो गया जबकि 2015-16 में यह घाटा 25,300 करोड़ था। उन्होंने कहा कि जरूरत के मुताबिक 5500 बसों की कमी के बाद दिल्ली की सड़कों पर 3937 बसें ही सेवा में थी।
देवेंद्र यादव ने कहा कि आआपा की सरकार 2024 तक शासन में रही और सीएजी रिपोर्ट 2022 तक की है। 2022-23 और 2023-24 के डीटीसी घाटे का आंकलन नहीं है। अगर इन दो वर्षों के घाटे का आंकलन सामने आए तो यह घाटा लगभग 70 हजार करोड़ तक होगा
