दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने गुरुवार को वजीराबाद बैराज जलाशय के जलशोधन संयंत्र (डब्लूटीपी) और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि वजीराबाद बैराज की जल भंडारण क्षमता को अगले डेढ़ महीने में दोगुना किया जाएगा, जिससे गर्मियों के दौरान भी दिल्ली में जल आपूर्ति सुचारू बनी रहेगी।
जल मंत्री ने कहा कि पहले की सरकारों ने इस मुद्दे पर केवल बयानबाजी की लेकिन भाजपा सरकार जलाशय की खुदाई और विस्तार जैसे ठोस कदम उठा रही है। उन्होंने यहां ट्रीट किए गए पानी को पीकर उसकी गुणवत्ता परखने के बाद दिल्लीवासियों को आश्वस्त किया कि राजधानी में स्वच्छ और सुरक्षित जल की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि दिल्ली सरकार अगले 50 साल के लिए जल प्रबंधन का मास्टर प्लान तैयार कर रही है, ताकि जल संकट जैसी कोई स्थिति न उत्पन्न हो।
मंत्री ने पूर्ववर्ती केजरीवाल सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि मैंने किसी के घर में जाकर 20 लीटर की बिसलेरी की बोतल रखकर दिखावा नहीं किया। वह जलशोधन संयंत्रों में जाकर वही पानी पिया, जो हर घर में सप्लाई हो रहा है। हम पारदर्शी तरीके से दिल्लीवासियों को स्वच्छ जल उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
उन्होंने बताया कि यमुना में बढ़ते प्रदूषण और अवैध अतिक्रमण को रोकने के लिए भी कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। दिल्ली जल बोर्ड ने भारतीय सेना की टेरिटोरियल आर्मी से अनुरोध किया है कि यमुना में किसी भी प्रकार का अतिक्रमण न हो और कोई कूड़ा-कचरा न डाले। इसके लिए निगरानी को और कड़ा किया जाएगा और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
प्रवेश वर्मा ने बताया कि दिल्ली में जल प्रबंधन अब तक केवल फायर फाइटर मोड में था—जहां कोई समस्या आई, वहीं अस्थायी समाधान किया गया। अब सरकार 50 साल की दीर्घकालिक योजना पर काम कर रही है, जिससे पाइपलाइन लीकेज, जल संरक्षण और जल वितरण प्रणाली को पूरी तरह अपग्रेड किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि दिल्ली में पानी की बड़ी समस्या पुरानी पाइपलाइनों और घरों में लगी मोटरों की वजह से बनी लीकेज है, जिससे अनावश्यक जल हानि हो रही है। अभी तक दिल्ली में कोई मास्टर प्लान नहीं था लेकिन अब इसे वैज्ञानिक तरीके से बनाया जा रहा है, जिससे भविष्य में जल संकट जैसी स्थिति ही न बने।
निरीक्षण के दौरान जल मंत्री ने बताया कि वजीराबाद बैराज से आने वाले पानी का टीडीएस स्तर 170 पाया गया, जो कि विश्व स्वास्थ्य संगठन और भारतीय मानकों के अनुसार पूरी तरह सुरक्षित है। सभी जलशोधन संयंत्रों और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। जल मंत्री ने कहा कि सरकार एक आईटी डैशबोर्ड विकसित कर रही है, जिससे हर जलशोधन संयंत्रों और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स के जल ग्रहण और निकासी की रीयल-टाइम निगरानी की जा सके।
