अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा फारस की खाड़ी का नाम बदलकर ‘अरब की खाड़ी’ या ‘अरब की खाड़ी’ करने के अब निरस्त किए गए कदम की ईरानी अधिकारियों ने कड़ी निंदा की है। ईरान ने इसे अपनी राष्ट्रीय पहचान और ऐतिहासिक विरासत पर राजनीतिक रूप से आरोपित हमले के रूप में देखा। कथित तौर पर यह सुझाव ट्रंप की सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा से पहले सामने आया। हालाँकि इस योजना को कभी औपचारिक रूप नहीं दिया गया, लेकिन तेहरान ने तुरंत इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त की। ईरान के गृह मंत्रालय में अंतर्राष्ट्रीय मामलों के उप-प्रमुख नासिर सेराज ने इस विचार को राष्ट्रों के सांस्कृतिक अधिकारों का उल्लंघन और ईरानी लोगों की ऐतिहासिक पहचान पर हमला करार दिया।
विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने प्रस्तावित नाम परिवर्तन को राजनीति से प्रेरित और शत्रुतापूर्ण बताते हुए चेतावनी दी कि सदियों पुराने नामकरण को बदलने से केवल व्यापक आक्रोश भड़केगा।
