नई दिल्ली। पद्मभूषण गोपालदास ‘नीरज’ के जन्म शताब्दी वर्ष के निमित्त दिल्ली की साहित्यिक संस्था ‘पर्पल पेन’ ने रविवार को ‘नमन नीरज-स्वरांजलि’ आयोजित की, जिसमें नीरज के सुपुत्र मिलन प्रभात गुंजन, पुत्रवधु रंजना सक्सेना विशेष रूप से उपस्थित हुए। आयोजन के मुख्य अतिथि विख्यात कवि लक्ष्मी शंकर बाजपेई थे और प्रसिद्ध कवयित्री ममता किरण विशिष्ट अतिथि के रूप में मंचासीन रहीं।
पर्पल पेन की संस्थापक अध्यक्ष वसुधा ‘कनुप्रिया’ के संयोजन में इस गरिमा पूर्ण कार्यक्रम में दिल्ली-एनसीआर से आए कवियों और गायकों ने कवि नीरज की रचित कविताओं और गीतों की मनोहर प्रस्तुति करके उन्हें श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। नीरज की प्रसिद्ध कविता ‘अब युद्ध नहीं होगा’ का पाठ कर वसुधा कनुप्रिया ने काव्य पाठ सत्र का शुभारंभ किया। सर्व श्री/सुश्री ममता किरण, डॉ. रंजना अग्रवाल, ओम सपरा, मनीष नय्यर, दिनेश आनंद, ख़ुर्रम नूर, पुष्पा शर्मा, बबली सिन्हा वन्या, डॉ. माधवी करोल, लिज़ा खान, अनिल मासूम, प्रेरणा सिंह, गोपाल गुप्ता, संगीता वर्मा, सचिन परवाना, अंजू अग्रवाल, पूनम मल्होत्रा, प्रतिभा सपरा, रजनी रामदेव, शालिनी शर्मा, अभिलाषा विनय, पूजा श्रीवास्तव ने नीरज की कुछ मशहूर कविताओं और फिल्मी गीतों की बेहतरीन प्रस्तुति दी। काव्य सत्र के बाद नीरज के सुपुत्र और पुत्रवधू ने कवि गीतकार नीरज के साथ अपने रोचक संस्मरण साझा किए।
दूसरे सत्र में नीरज के लिखे प्रसिद्ध फिल्मी गीतों की प्रस्तुति हुई। नीरज के पुत्र मिलन प्रभात गुंजन और पुत्रवधू रंजन ने ‘हे मैंने क़सम ली’ जब गाया तो पूरा सदन तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। गुंजन जी ने एक एकल गीत ‘प्रेम के पुजारी हम हैं’ भी पेश किया। सुश्री ममता किरण ने नीरज के मशहूर गीत ‘जैसे राधा ने माला जपी श्याम की’ गाकर संगीत सत्र का आगाज किया। मुख्य अतिथि बाजपेई ने नीरज का सर्वाधिक लोकप्रिय गीत ‘कारवां गुज़र गया’ गाकर आयोजन का समापन किया।
