नई दिल्ली। देश के वैज्ञानिकों, डॉक्टरों और विशेषज्ञों के राष्ट्रीय सम्मेलन “माइक्रोकॉन 2025” का आयोजन सोमवार को नई दिल्ली के अशोका होटल में हुआ। क्लिनिकल माइक्रोबायोलॉजी, संक्रमण नियंत्रण और जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में नवीनतम प्रगति पर केंद्रित इस पांच दिवसीय आयोजन का शुभारंभ दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कोविड-19 महामारी के दौरान माइक्रोबायोलॉजी के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उसके लिए हम सब आभारी हैं।
कुलपति ने 2023 में रिलीज हुई फिल्म “द वैक्सीन वॉर” का जिक्र करते हुए कहा कि इस फिल्म में दिखाया गया है कि मीडिया में यह नेरेटिव सेट किया गया था कि भारत वैक्सीन नहीं बना सकता, लेकिन हमने इसे कर दिखाया। यह गर्व की कहानी है। उन्होंने कहा कि भारत को अपने चिकित्सकों, वैज्ञानिकों और माइक्रोबायोलॉजी के प्रोफेसरों पर गर्व है, जिन्होंने उस कठिन समय में यह कर दिखाया।
प्रो. योगेश सिंह ने सार्वजनिक स्वास्थ्य को सशक्त बनाने में माइक्रोबायोलॉजिस्ट्स की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी जोर दिया। इस सम्मेलन का आयोजन इंडियन एसोसिएशन ऑफ मेडिकल माइक्रोबायोलॉजिस्ट्स (आईएएमएम) ने किया था।
सम्मेलन के आयोजक अध्यक्ष डॉ. चांद वाट्टल ने बताया कि इस सम्मेलन में देशभर के 150 से अधिक संस्थानों से आए 1800 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसमें एआईआईएमएस, पीजीआईएमईआर सहित प्रमुख चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञों द्वारा 26 से अधिक कार्यशालाएं और निरंतर चिकित्सा शिक्षा सत्र (सीएमई) आयोजित किए गए। सम्मेलन की वैज्ञानिक रूपरेखा में उभरते संक्रामक रोग, एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर), डायग्नोस्टिक इनोवेशन, संक्रमण की रोकथाम और भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों की तैयारी जैसे विषय शामिल रहे।
आयोजन सचिव डॉ. जसविंदर ओबेरॉय ने बताया कि हमारे समुदाय ने पोलियो उन्मूलन से लेकर कोविड-19 महामारी तक हर चुनौती का सामना किया है, जो हमारी नवाचार क्षमता और सेवा भावना को दर्शाता है।
सह-आयोजन सचिव डॉ. विकास मनचंदा ने कहा कि इस क्षेत्र के युवा साथियों के लिए यह सम्मेलन उन्हें ‘प्रैक्टिस-रेडी’ और ‘फ्यूचर-रेडी’ बनने में मदद करेगा, जिससे वे वर्तमान और भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों का आत्मविश्वास से सामना कर सकें।
सम्मेलन में डायग्नोस्टिक स्टीवार्डशिप और एंटीमाइक्रोबियल स्टीवार्डशिप जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए गए जो रोगों के सटीक निदान, संक्रमण की रोकथाम और एंटीबायोटिक दवाओं के विवेकपूर्ण उपयोग को प्रोत्साहित करते हैं।
