नई दिल्ली, 26 नवंबर । दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (आई4सी) ने गृह मंत्रालय के साथ मिलकर “साइबर सतर्कता” नाम के एक महीने का साइबर सिक्योरिटी अवेयरनेस कैंपेन आयोजित किया। बुधवार को इस कार्यक्रम के समापन पर मुख्य अतिथि डीयू कुलपति प्रो. योगेश सिंह और विशिष्ट अतिथि रजिस्ट्रार डॉ विकास गुप्ता एवं इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (आई4सी) के निदेशक निशांत कुमार रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डीयूसीसी के निदेशक प्रो. संजीव सिंह ने की। समापन समारोह के अंत में कुलपति ने इस कैंपेन के दौरान आयोजित क्विज के विजेताओं को पुरस्कृत भी किया।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने कहा कि आज हम पूरी तरह से मोबाइल फोन, कंप्यूटर और इंटरनेट आदि से जुड़े उपकरणों पर निर्भर हैं। इसके बिना कल्पना भी नहीं कर सकते। आज का युग पूरी तरह से साइबर युग है। कोई नहीं जानता कि उन उपकरणों के अंदर क्या है, ऐसे में साइबर सतर्कता बहुत अहम मुद्दा है। उन्होंने कहा कि कुछ मिथ हैं कि अगर मैं बड़ा आदमी या कंपनी नहीं हूं तो मैं साइबर हमलावरों के निशाने पर नहीं हो सकता, लेकिन ऐसा नहीं है। हमलावरों के निशाने पर कमजोर लोग सबसे ज्यादा होते हैं।
उन्होंने बताया कि 1990 के दशक तक बैंकिंग कार्य केवल सुबह साढ़े दस बजे से दोपहर बाद दो बजे तक ही होते थे। दो बजे से सायं पांच बजे तक सभी बैंक कर्मी लेजर में एंट्री और रिकॉर्ड मिलाने आदि के काम निपटाते थे। आज उन चीजों की जरूरत नहीं है। आज बैंकिंग सिस्टम में मिलियनों ट्रांजेक्शन ऑनलाइन हो रही हैं। लेकिन फिर भी हम सब विश्वास रखते हैं कि हमारी पूंजी सुरक्षित है और कुछ भी गलत नहीं होगा।
कुलपति ने बताया कि इंडियन कंप्यूटर इमर्जेंसी रिस्पांस टीम के डेटा के अनुसार 2024 में 1.4 मिलियन से अधिक साइबर घटनाएं हुई हैं। 2025 में यह घटनाएं 1.8 मिलियन से भी अधिक ट्रैक हो चुकी हैं। इसलिए यह क्षेत्र हमारे लिए ध्यान देने का महत्वपूर्ण क्षेत्र है और हमें इसके बारे में सोचने की जरूरत है। इस विषय को लेकर एक महीने का साइबर सिक्योरिटी अवेयरनेस कैंपेन चलाने के लिए कुलपति ने डीयूसीसी को बधाई देते हुए कहा कि यह विषय यहीं समाप्त नहीं होता। हमें हर दिन हर समय जागरूक रहने की जरूरत है।
इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (आई4सी) के निदेशक निशांत कुमार ने सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि सभी को साइबर स्वच्छता के बारे में जानना जरूरी है। उन्होंने कहा कि कैसे एक 10वीं फेल व्यक्ति पीएचडी वालों को भी बेवकूफ बना रहा है। हम लोग लालच, डर और लापरवाही से साइबर क्राइम को बढ़ावा दे रहे हैं। किसी भी साइबर क्राइम का शिकार होने पर घबराएं नहीं, बल्कि तुरंत भारत सरकार द्वारा जारी साइबर हेल्प लाइन 1930 पर काल करें।
समापन समारोह की अध्यक्षता करते हुए डीयूसीसी के निदेशक प्रो. संजीव सिंह ने बताया कि इस पहल के तहत डीयू कम्युनिटी तक 1.32 करोड़ से ज्यादा साइबर अवेयरनेस मैसेज भेजे गए, जिससे युवाओं को जानकारी और जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार के जरिए बढ़ते ऑनलाइन खतरों से निपटने में मदद मिली।
