इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम (CERT-In) ने शुक्रवार को यूरोप, अमेरिका और मध्य एशिया से आए विदेशी पत्रकारों के प्रतिनिधिमंडल के लिए एक विशेष साइबर सुरक्षा परिचय एवं संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया।
विदेश मंत्रालय के सहयोग से आयोजित इस सत्र में भारत के साइबर सुरक्षा ढांचे, उभरते डिजिटल खतरों और वैश्विक साइबर रक्षा में भारत की बढ़ती भूमिका पर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता CERT-In के महानिदेशक एवं प्रमाणन प्राधिकरणों के नियंत्रक संजय बहल ने की।
प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए बहल ने CERT-In के प्रमुख कार्यों पर प्रकाश डाला, जिनमें साइबर घटनाओं पर त्वरित प्रतिक्रिया, संकट प्रबंधन, भेद्यता मूल्यांकन, सूचना साझा करना, सुरक्षा लेखा परीक्षकों की नियुक्ति और विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया की परिकल्पना को साकार करने के लिए CERT-In अनुसंधान सहयोग, सार्वजनिक-निजी भागीदारी और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सक्रिय सहभागिता के माध्यम से एक मजबूत साइबर सुरक्षा पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में अहम भूमिका निभा रहा है।
बहल ने भारत के एक उभरते वैश्विक साइबर सुरक्षा केंद्र के रूप में विकसित होने का उल्लेख करते हुए बताया कि देश में 400 से अधिक साइबर सुरक्षा स्टार्टअप और 65 लाख से अधिक कुशल पेशेवर कार्यरत हैं, जो लगभग 20 अरब अमेरिकी डॉलर के उद्योग को समर्थन दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियां खतरे की पहचान, साइबर फोरेंसिक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित निगरानी के क्षेत्र में अत्याधुनिक समाधान विकसित कर रही हैं।
बदलते साइबर खतरे परिदृश्य पर चर्चा करते हुए बहल ने AI को एक “दोधारी तलवार” बताया, जो साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और हमलावरों दोनों के लिए उपयोगी बन रही है। उन्होंने कहा कि CERT-In वास्तविक समय में खतरे की पहचान और प्रतिक्रिया के लिए AI-आधारित विश्लेषण और स्वचालन का उपयोग करता है, साथ ही AI-सक्षम साइबर हमलों से निपटने के लिए उन्नत प्रतिकार उपाय भी विकसित किए जा रहे हैं।
कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों को CERT-In की क्षमता निर्माण पहलों, नियमित साइबर सुरक्षा अभ्यासों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बारे में भी जानकारी दी गई। इनमें संयुक्त अभ्यास और फ्रांस की राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसी (ANSSI) के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर उच्च-स्तरीय जोखिम विश्लेषण रिपोर्ट पर सहयोग शामिल है।
CERT-In की सहकारी बैंकों में साइबर सुरक्षा को मजबूत करने और नागरिकों के डिजिटल उपकरणों की सुरक्षा से जुड़ी पहलों का उल्लेख विश्व आर्थिक मंच (WEF) की ग्लोबल साइबर सुरक्षा आउटलुक 2025 रिपोर्ट में भी किया गया है।
संजय बहल ने बताया कि वर्ष 2024 में भारत में रैंसमवेयर के 147 मामले दर्ज किए गए, लेकिन CERT-In की समन्वित प्रतिक्रिया और वास्तविक समय में खुफिया जानकारी साझा करने की व्यवस्था के चलते इनके प्रभाव को काफी हद तक सीमित किया जा सका।
