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13 दिसंबर । वित्त मंत्रालय के अधीन वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) ने बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा (बीएफएसआई) क्षेत्रों में शिकायत निवारण तंत्र को सुव्यवस्थित और मजबूत करने के लिए कई उपाय शुरू किए हैं, जिसका उद्देश्य ग्राहकों के विश्वास और सेवा की गुणवत्ता को बढ़ाना है।
इस पहल के तहत, वित्तीय सेवा सचिव हर महीने व्यक्तिगत रूप से 20 चयनित शिकायतों की समीक्षा कर रहे हैं, जिससे नागरिकों को संबंधित संस्थानों के अध्यक्षों, प्रबंध निदेशकों, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और वरिष्ठ प्रबंधन की उपस्थिति में सीधे अपनी चिंताओं को उठाने का अवसर मिल रहा है। अधिकारियों ने कहा कि इस प्रक्रिया का जवाबदेही और ग्राहक विश्वास पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
अब तक ऐसी 15 समीक्षा बैठकें हो चुकी हैं, जिनमें 300 शिकायतों का विश्लेषण करके उनका गुणात्मक समाधान सुनिश्चित किया गया है। संयुक्त सचिवों द्वारा भी इसी प्रकार की समीक्षा की जा रही है, जबकि वित्तीय संस्थानों के प्रमुखों को अपने संगठनों में इस प्रक्रिया को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। इसका उद्देश्य शीर्ष स्तर की समीक्षा प्रणाली के माध्यम से शिकायत निवारण की प्रभावशीलता का आकलन करना है।
डीएफएस ने 2025 के लिए सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ केंद्रीकृत सार्वजनिक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (सीपीग्राम) कार्यशालाओं का पहला चरण भी पूरा कर लिया है। अगस्त में पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) और अक्टूबर में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) सहित नियामकों के साथ अलग-अलग कार्यशालाएं आयोजित की गईं, जिनमें शिकायत अधिकारियों, वरिष्ठ प्रबंधन और लोकपालों ने भाग लिया। इसी तरह की एक कार्यशाला भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) और बीमा कंपनियों के साथ 19 दिसंबर को हैदराबाद में आयोजित की जानी है।
बैंक शाखाओं में ग्राहक सेवा में सुधार लाने के लिए, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को वॉइस कॉल, ईमेल और क्यूआर कोड जैसे प्रौद्योगिकी-आधारित फीडबैक तंत्र अपनाने की सलाह दी गई है। डीएफएस ने जून 2025 से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, निजी क्षेत्र के बैंकों और सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों की प्रदर्शन-आधारित रैंकिंग भी शुरू की है, जो शिकायत निवारण की गुणवत्ता और समयबद्धता पर आधारित है, जिससे प्रक्रिया में लगने वाला समय कम होगा और पारदर्शिता बढ़ेगी। निजी बीमा कंपनियों की रैंकिंग पर विचार किया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त, डीएफएस ने दिसंबर 2025 से ‘वित्तीय संस्थान संवाद कार्यक्रम’ शुरू किया है, जिसके तहत सीपीग्राम पोर्टल के माध्यम से प्राप्त शिकायतों के आधार पर संगठनों के साथ बैठकें आयोजित की जाती हैं। इस पहल के पहले चरण के लिए गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों का चयन किया गया है।
