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सूरजपुर, 20 फ़रवरी । पशुधन विकास विभाग सूरजपुर द्वारा पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत श्वानों के स्टरलाइजेशन (नसबंदी) का विशेष अभियान प्रारंभ किया गया है। यह अभियान सुप्रीम कोर्ट के सू-मोटो रिट पिटीशन 2025 में दिए गए निर्देशों के अनुपालन में संचालित किया जा रहा है।
विभागीय अधिकारियों ने शुक्रवार काे बताया कि रेबीज एक अत्यंत घातक और जानलेवा बीमारी है, जिससे बचाव का एकमात्र प्रभावी उपाय समय पर टीकाकरण है। नागरिकों से अपील की गई है कि वे अपने पालतू पशुओं का नियमित टीकाकरण अवश्य कराएं।
विशेषज्ञों के अनुसार रेबीज वायरस मनुष्य एवं पशुओं के तंत्रिका तंत्र को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। इसके प्रारंभिक लक्षणों में सुस्ती, बुखार, उल्टी या मिचली, भूख न लगना शामिल हैं। रोग बढ़ने पर लकवा, सांस लेने और भोजन-पानी निगलने में कठिनाई, अत्यधिक उत्तेजना तथा बिना कारण काटने की प्रवृत्ति दिखाई दे सकती है।
विभाग ने सलाह दी है कि किसी पशु द्वारा काटे जाने की स्थिति में घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से अच्छी तरह धोएं तथा चिकित्सक से परामर्श लेकर एंटी-रेबीज टीका अवश्य लगवाएं।
पशुधन विकास विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने आसपास के पालतू पशुओं एवं श्वानों का टीकाकरण कराकर रेबीज जैसी संक्रामक बीमारी की रोकथाम में सक्रिय सहयोग प्रदान करें।
