रायपुर । आषाढ़ शुक्ल पक्ष अष्टमी के पावन अवसर पर मंगलवार को अष्टान्हिका महापर्व का हर्षोल्लास के साथ प्रारंभ हुआ। इस पुनीत अवसर पर प्रातः 8 बजे बड़ा मंदिर में मूलनायक भगवान के समक्ष श्रीजी का अभिषेक और भव्य शांतिधारा का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने उमंग और भक्ति-भाव के साथ सहभागिता की। मंत्रोच्चार और शांतिधारा का सौभाग्य मुनि आगम सागर महाराज के पावन सानिध्य एवं उनके मुखारविंद से शांतिधारा कर्ता परिवार के नाम का मंगल उच्चारण किया गया।
अष्टान्हिका पर्व के प्रथम दिन यह भव्य शांतिधारा करने का सौभाग्य विजय कुमार नायक, अजय कुमार नायक एवं संजय कुमार नायक जैन परिवार को प्राप्त हुआ। संतों की आहारचर्या व पुण्यार्जक परिवार कार्यक्रम के पश्चात् नगर में विराजमान संतों को नवधा भक्ति पूर्वक आहार कराने का सौभाग्य विभिन्न परिवारों और मंडलों को प्राप्त हुआ। मुनि आगम सागर महाराज को आहार देने का सौभाग्य बंशीलाल जैन परिवार, मुनि पुनीत सागर महाराज को आहार देने का सौभाग्य आदिनाथ महिला मंडल, धैर्य सागर महाराज को आहार देने का सौभाग्य अनुराग जैन परिवार तथा स्वागत सागर महाराज को आहार देने का सौभाग्य विजय नायक, अजय नायक, संजय नायक जैन परिवार को प्राप्त हुआ।
मुनिराज के मार्मिक प्रवचन
आहारचर्या और अनुष्ठानों के पश्चात आयोजित धर्मसभा में मुनिराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए ‘सम्यक् दर्शन, सच्ची श्रद्धा और आहारदान के महात्म्य’ पर विस्तार से प्रकाश डाला।
मुनि आगम सागर ने कहा कि जिनेंद्र भगवान और देव-शास्त्र-गुरु के प्रति पूर्ण श्रद्धा ही सम्यक दर्शन है। श्रद्धा में कमी होने पर साधक को उसका पूरा फल नहीं मिलता, किंतु पूर्ण श्रद्धा होने पर मोक्ष और कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है। जिनेंद्र भगवान के प्रति सच्ची आस्था रखने वाला व्यक्ति मर्यादा का पालन करता है, सूर्योदय के बाद (दिन में) भोजन करता है और प्रतिदिन भगवान की पूजन-आराधना करता है।मुनिश्री ने बताया कि जो भक्त दरबार में किसी लालच या कामना के साथ आता है, उसे उसकी मांग के अनुसार मिलता है; किंतु जो बिना किसी स्वार्थ और याचना के केवल सच्ची भक्ति भाव से आता है, उसे उसकी कल्पना से भी कई गुना अधिक प्राप्त होता है।।
